जसवंतनगर। चौधरी सुघर सिंह इंटर कालेज की छात्रा शिवा ने इंटर ने 96.80 प्रतिशत अंक पाकर जिले में दूसरा स्थान हासिल किया है। उनके पिता रवींद्र सिंह किसान हैं और मां सुनीता देवी सरकारी शिक्षक हैं। शिवा ने बताया कि उन्होंने स्कूल और कोचिंग के अलावा आठ से 10 घंटे पढ़ाई करके यह मुकाम हासिल किया है। वह आईपीएस बनना चाहती हैं। (संवाद)
पिता ने पानीपुरी बेचकर पढ़ाया, दिव्या ने नाम कमाया
जसवंतनगर। कस्बे के शांति देवी इंटर कालेज की छात्रा दिव्या ने 12 वीं की परीक्षा में 96.40 अंक हासिल करके अपने परिजनों का नाम रोशन किया है। पिता उमाशंकर गुप्ता ने पानीपूरी बेचकर परिवार का पालन पोषण किया। पिता की मेहनत देखकर बेटी ने भी मेहनत से पढ़ाई की और जिले में तीसरा स्थान हासिल किया। दिव्या ने बताया कि उसने आठ से 10 घंटे पढ़ाई करके यह उपलब्धि पाई है। बड़ी बहन लक्ष्मी की शादी हो गई। मां गृहणी हैं। दिव्या का यूपीएससी पास करके अधिकारी बनने का सपना है। (संवाद)
बेटी ने मां को दिया सफलता का शगुन
इटावा। श्हर के शिवाजी इंटर कॉलेज की छात्रा शगुन प्रजापति ने दसवीं में 97.17 अंक पाकर जिले में पहला स्थान हासिल किया है। मां ने निजी पैथोलॉजी पर नौकरी करके मेहनत से पढ़ाई कराई। मां की मेहनत को देखकर बेटी ने दिन रात पढ़ाई की। शगुन ने बताया कि वह 10 से 12 घंटे पढ़ती थीं। वह इंजीनियर बनकर मां का नाम रोशन करना चाहती है। (संवाद)
किसान की बेटी रिया ने दूसरा स्थान हासिल किया
जसवंतनगर। चौ. सुधर सिंह इंटर कालेज हाईस्कूल की छात्रा रिया ने 96.17 प्रतिशत अंक पाकर जिले की मेरिट सूची में दूसरा स्थान हासिल किया है। वह कस्बे के पास के गांव धरवार की रहने वाली है। पिता नीलेश कुमार किसान हैं। उसने बताया कि वह प्रतिदिन आठ घंटे लक्ष्य बनाकर पढ़ती थी। वह इंजीनियर बनकर अपने परिवार को मजबूती देना चाहती है। बताया कि यदि ठान लो तो आसानी से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। (संवाद)
पिता ने चक्की चलाई, बेटे की मेहनत रंग लाई
जसवंतनगर। चौ. सुघर सिंह इंटर कालेज के छात्र नाजिम अली ने 96 प्रतिशत अंक पाकर जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। उनके पिता चक्की
चलाते हैं। मां साजिदा बेगम गृहणी हैं। वह तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उन्होंने बताया कि घर की स्थितियां ठीक न होने के बावजूद पिता ने कभी भी उनकी पढ़ाई में अड़चन नहीं आने दी। वह आईआईअी में दाखिला लेकर इंजीनियर बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वह छह से सात घंटे प्रतिदिन पढ़ते थे। (संवाद)