इटावा। जर्जर परिषदीय विद्यालयों में जान जोखिम में डालकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। कहीं प्लास्टर टूट रहा है तो कहीं सरिया बाहर निकल आईं हैं, इसके बाद भी शिक्षण जारी है। कुछ स्कूलों में पुताई कराकर सच्चाई छिपाने का प्रयास किया गया। यहां बच्चों को बरामदे में बैठाया जा रहा है।
जिले में 1484 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से 157 को जर्जर घोषित किए जा चुका है लेकिन अभी तक सिर्फ 51 भवनों को ही ध्वस्त किया गया है। इनकी जगह पर नया भवन बनाया जाना है। शासन की ओर से इन भवनों में पढ़ाई पर रोक लगाई गई है लेकिन खतरे के बीच शिक्षण चल रहा है। गुरुवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने बीएसए को आदेश दिए हैं कि वह प्रधानाध्यापकों से प्रमाणपत्र लें कि वह जर्जर विद्यालयों में पढ़ाई नहीं करा रहे हैं। बीएसए मामले में जवाब तलब करने की बात कह रहे हैं।
तीनों कक्ष जर्जर, कक्षाएं जारी
निबाड़ीकला पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तीनों कक्ष जर्जर हो चुके हैं। इसके बावजूद यहां कक्षाएं चल रही हैं। शुक्रवार को सभी कक्षाओं के बच्चे बरामदे में बैठे पढ़ते मिले। प्रधानाध्यापक अजय तिवारी ने बताया कि भवन जर्जर है, इस बारे में अधिकारियों को भी पता है। पढ़ाई के लिए कोई और जगह नहीं है, इसलिए बरामदे में पढ़ाया जा रहा है।
जगह नहीं तो और कहां पढ़ाएं
बकेवर के शेरपुर कंपोजिट विद्यालय में सात कमरे हैं। इनमें दो जर्जर हैं। कक्षा पांच के छात्रों के साथ ही इसी भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे भी जर्जर कमरों में बैठ रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका प्रियंका पांडेय ने बताया कि विद्यालय में 117 बच्चे हैं।
जगह न होने के कारण खस्ताहाल कमरे में ही बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। दीवारें चटकीं और प्लास्टर टूटने से हमेशा डर बना रहता है। प्रधानाध्यापक मीरा देवी ने बताया कि उन्होंने तीन माह पहले भवन जर्जर होने के बारे में अधिकारियों को अवगत करा दिया था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चंद्रकांती ने बताया कि केंद्र में 40 बच्चे हैं।
लगता है डर पर जताई मजबूरी
सरायमिट्ठे गांव के कंपोजिट विद्यालय में आठ कक्षों में तीन जर्जर हैं। प्लास्टर गिरता है और दीवारों में दरारें हैं। बारिश में पानी कमरों में आ जाता है। एक कक्ष में आंगनबाड़ी केंद्र है। इसमें प्लास्टर गिरने पर बच्चे डर जाते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मीना देवी ने बताया कि शुक्रवार को भी कमरे की छत से प्लास्टर टूट गया। कमरे की सफाई कराई। बच्चों को यहां पढ़ाने में डर लगता है, लेकिन मजबूरी है।
जर्जर भवनों में छात्र-छात्राओं को न बैठाने के आदेश हैं। सभी से इस संबंध में रिपोर्ट भी तलब की गई है। प्रधानाध्यापक जर्जर भवन में पढ़ाई नहीं करा रहे हैं, इसका प्रमाणपत्र उनसे मांगा गया है। यदि फिर भी जर्जर भवन में कक्षाएं चलाई जा रही हैं तो जवाब तलब कर सुरक्षित स्थान पर कक्षाएं संचालित कराई जाएंगी। - शैलेश कुमार, बीएसए।