इटावा। फुटपाथों पर कब्जों के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त है। बाजारों में तो बीच सड़क वाहनों की पार्किंग होती है। संकरी सड़कें तो मानो गुम सी हो गईं हैं। करीब तीन लाख की आबादी वाले शहर में छोटे-बड़े करीब एक दर्जन बाजार हैं, लेकिन कहीं भी पार्किंग नहीं है। लोग मजबूरी में सड़कों पर वाहन खड़े कर देते हैं। इससे जाम की समस्या रहती है। यातायात माह शुरू हुए 11 दिन बीत गए हैं लेकिन विभाग इसके प्रति अनजान बना हुआ है। यातायात सुगम बनाने के नाम पर अफसर सिर्फ कोरम पूरा करने में लगे हैं। लोगाें का कहना है कि नगर पालिका और पुलिस के बीच सामंजस्य की कमी है। यही कारण है कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ छह महीने से कोई अभियान नहीं चला। मई में अभियान चलाकर जिन फुटपाथ और सड़कों को खाली कराया गया था, उन पर फिर से अतिक्रमण हो गया है।
बाजाजा लाइन बाजार : मुख्य बाजार में बाहर तक लगीं दुकानों के कारण फुटपाथ गुम है। बाजार में आने वाले लोग वाहन सड़क पर खड़े करते हैं। यह स्थिति सड़क की दोनों ओर पट्टी की है। बाजार में भीड़ बढ़ती है तो यातायात थमने लगता है। पटरी के दुकानदारों के कारण हालात ज्यादा खराब हैं।
तिकोनिया बाजार : यहां आने वाले लोग बीच सड़क वाहन खड़ा कर देते हैं। दुकानें फुटपाथ तक लगी हैं। पटरी दुकानदार भी सड़क किनारे बैठे रहते हैं। बाजार में बड़े वाहनों की नो-इंट्री है, इसके बाद भी इनका आवागमन जारी है।
काहरन पुल : इसके दोनों ओर पटरी दुकानदारों का कब्जा है। कपड़े, फैंसी आइटम, जूते-चप्पल आदि की दुकानें सड़क तक फैली हैं। इस पुल पर सीओ चौराहे की ओर से तीन और चार पहिया वाहनों को आने की छूट है। अतिक्रमण के कारण जाम लगता है।
अशोक नगर मार्केट : यह बाजार फर्रुखाबाद रोड पर स्थित है। यहां का फुटपाथ अवैध कब्जों की गिरफ्त में है। करीब 20 फीट चौड़े फुटपाथ पर फर्नीचर बेचने से लेकर वाहनों की मरम्मत की जाती है। आएदिन जाम लगता है।
यह सही है कि फुटपाथ पर कब्जे हो गए हैं। पार्किंग स्थल न होने से वाहन सड़कों पर खड़े हो रहे हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए पुलिस विभाग की मौजूदगी में व्यापारियों से वार्ता की जाएगी। कोशिश रहेगी कि जल्द समस्या दूर हो। - विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका सदर।