इटावा/ताखा। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की नींद उड़ा दी है। किसान कभी खेत में बिछी गेहूं की फसल को देखता है तो कभी बची फसल को बचाने की जद्दोजहद में जुट जाता है। शनिवार को भी बदली छाई रही तो किसान खेत में पहुंचकर गेहूं की कटाई में जुट गए। उनका कहना है कि अब बारिश हुई तो फसल में बचा दाना भी सड़ जाएगा। फसल न बची तो रूखी सूखी खाकर गुजारा करना पड़ेगा।
ताखा ब्लॉक क्षेत्र में शुक्रवार रात हुई बारिश व ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। ताखा, परशुरामपुर, बालापुर, नगरिया यादवान, समथर, अमथरी, नगला ढकाऊ समेत करीब 50 गांवों के किसानों की मेहनत बारिश में बर्बाद हो गई। फसल काटने की तैयारी थी, ओलावृष्टि ने उनके सपनों को चूर कर दिया। फसल खेतों में बिछ गई है। ओलावृष्टि से दस फीसदी से अधिक गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। किसानों का कहना है कि बालियां टूटने से पैैदावार कम होगी।
किसानों ने बताई पीड़ा
किसान रामनरेश ने बताया कि तेज हवा के साथ बारिश से गेहूं की फसल गिर चुकी है। बारिश और हुई तो गेहूं की बाली पानी में पड़े रहने से सड़ जाएगी। गेहूं के दाने काले पड़ जाएंगे। ऐसे में बाजार में अच्छे दाम भी नहीं मिल पाएंगे।
किसान गजराज सिंह का कहना है कि गेहूं की फसल तैयार है। बूंदाबांदी की वजह से कटाई शुरू नहीं की थी। शुक्रवार रात को तेज हवा से पूरी फसल बिछ गई। ओले गिरने से मटर की फसल भी नहीं बच सकी और काफी नुकसान हुआ है।
किसान बाबूराम ने भी पीड़ा बताई। कहा कि बारिश व ओलावृष्टि होने से तीन बीघा गेहूं की फसल बिछ गई। यह भी खत्म हो गए तो परिवार कैसे चलेगा। मौसम की बेरुखी ने बर्बाद कर दिया।
बारिश व ओलावृष्टि होने से पैदावार पर असर नहीं पड़ेगा लेकिन फसल की गुणवत्ता पर असर जरूर पड़ेगा। गेहूं काला पड़ सकता है। - ब्रजेश यादव, एडीओ कृषि ताखा।
गेहूं की फसल काटने में जुटे किसान
बकेवर। मौसम में गुरुवार और शुक्रवार रात को हुए बदलाव के बाद किसानों की धड़कनें बढ़ गई हैं। खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल को बचाने के लिए किसानों ने कटाई तेज कर दी है। मौसम की सबसे अधिक मार किसानों पर पड़ी है। इस समय रबी की मुख्य फसल गेहूं खेतों में पक रही है। शनिवार को भी बादल छाए रहे। किसानों का कहना है कि अगर अब पानी गिरा तो गेहूं की फसल को काफी नुकसान होगा। जिन खेतों में गेहूं की फसल पक गई है, वहां किसान कटाई में जुट गए हैं। (संवाद)