फोटो संख्या 06: बच्चों को पॉलिथीन से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देते शिक्षक। संवाद
कंपोजिट विद्यालय में गोष्ठी में पॉलिथीन के बढ़ते प्रयोग पर वक्ताओं ने किया आगाह
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। पॉलिथीन स्वच्छता में बाधक है। स्वच्छता में बाधक है। आज के समय में पॉलिथीन का प्रयोग किए बिना जीवन की कल्पना मुश्किल नजर आती है। लेकिन पॉलिथिन के प्रयोग से बहुत से दुष्परिणाम हैं। पॉलिथीन की थैलियों को इस्तेमाल के बाद फेंकने से यह पर्यावरण के लिए गंभीर संकट उत्पन्न तो जाता है। यह बात सैफई क्षेत्र के गांव बौराइन के कम्पोजिट विद्यालय में पॉलिथीन प्रयोग के दुष्परिणाम विषय पर हुई गोष्ठी में प्रधानाध्यापिका मंजू भदौरिया ने कही।
जन शिक्षण संस्थान की ओर से आयोजित गोष्ठी में प्रधानाध्यापपिका ने कहा कि पॉलिथिन भूमि को प्रदूषित करने के साथ ही पेड़-पौधों और फसलों के वृद्धि व उत्पादन को भी प्रभावित करता है। इसके द्वारा जंगली पौधे और खेती की फसल दोनों ही प्रभावित होते हैं। पॉलिथीन में बंद खाद्य पदार्थ पशुओं के खाने से उनकी सेहत को भी अधिक नुकसान पहुंचता है।
पॉलिथीन खाने से जानवरों की मौत हो रही है। तालाब, नदी, नाली, पीने का पानी, पर्यावरण प्रदूषित कर रही है। कहा कि जब तक हम स्वयं पॉलिथीन का बहिष्कार नहीं करेगें, तब तक पॉलिथीन मानव जीवन के लिये कष्टदायी के साथ बर्बादी का कारण बनेगा।ऐसी स्थिति में हमें पॉलिथीन का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
ब्लॉक स्काउट मास्टर कमलेश कांत यादव ने मनोरंजन के माध्यम से बच्चों को पॉलीथिन और प्लास्टिक विषय की गंभीरता को समझाया। कहा कि पॉलिथीन गांव से लेकर शहर तक लोगों की सेहत बिगाड़ रही है। गांव की नालियां और शहर का ड्रेनेज सिस्टम पॉलिथीन से भरा मिलता है, इस वजह से नालियां और नाले जाम हो जाते हैं जो प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं।
प्लास्टिक के गिलास में चाय या गर्म दूध का सेवन करने से जो कैमिकल लोगों के पेट में जाता है उससे भी गंभीर बीमारियां होती है। पॉलिथीन का बढ़ता का उपयोग न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी खतरनाक होता जा रहा है। कहा कि पॉलिथीन पूरे देश के लिए एक गंभीर समस्या के रूप में उभरकर आ चुकी है। पहले जब व्यक्ति खरीदारी करने जाता था, तो कपड़े का थैला साथ लेकर जाता था, लेकिन आज खाली हाथ जाकर दुकानदार से पॉलिथीन मांग कर सामान लाते हैं।
कहा कि अखबार के लिफाफे की जगह भी पॉलिथीन ने ले ली है। जमीन पर जमा पॉलिथीन भूमि की जल सोखने की क्षमता को भी कम कर रही है जिससे भूजल स्तर भी गिरता जा रहा है। यह हम सभी का कर्तव्य है की हम पॉलिथीन का प्रयोग कम से कम करें और इसके स्थान पर कपड़े के थैले व कागज के थैलियों का इस्तेमाल करें।
सरकारों का पॉलिथीन बंद करने का प्रयास तभी सफल हो पाएगा, जब हम अपनी सोच बदलेंगे औरपॉलिथीन का प्रयोग न करने का संकल्प लेंगे। गोष्ठी में इंदु बाजपेयी, सोनम कुशवाहा, चंदन पोरवाल, कमल किशोर, अमन चतुर्वेदी आदि के अलावा करीब 70 विद्यार्थी उपस्थित रहे।