सैफई। नौ राजस्व गांवों की करीब 30 हजार आबादी के सामने अजीब परेशानी है। यह गांव कहने तो सैफई तहसील में है लेकिन यहां के लोगों को कुछ कामों के लिए जसवंतनगर तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अफसर इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
वर्ष 2016 में जसवंतनगर तहसील के राजस्व गांव विहारी भटपुरा, नगला अजाब, नगला सुभान, लरखौर, हैंवरा, नगला अनिया, बनामई, भुजपुरा बीवामऊ और कांटीहार को सैफई तहसील में शामिल किया गया था। इन राजस्व गांवों के जुड़ने से सैफई तहसील में 69 गांव हो गए। लेकिन बाद में जुड़े राजस्व गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। इन गांवों के बैनामा अभी भी उपनिबंधन कार्यालय जसवंतनगर में हो रहे हैंं। बैनामा के बाद पक्षकारों को नोटिस और दाखिल खारिज की प्रक्रिया सैफई तहसील में हो रही है। ऐसे में लोगों को इन दोनों तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
लोगों ने बताई समस्या
ग्राम नगला अनिया निवासी अवनीश यादव ने कहा कि उनके गांव के सारे काम सैफई तहसील में हों, इसके लिए सिर्फ एक आदेश जारी किया जाना है लेकिन यह काम भी अधिकारी नहीं कर रहे हैं।
बहादुरपुर निवासी रिंकू यादव ने कहा कि दोनों तहसीलों के चक्कर लगाते सात साल बीत गए हैं। पहले बैनामा कराने के लिए 15 किलोमीटर दूर जसवतनगर तहसील जाना पड़ता है और बाद में सैफई तहसील में दाखिल खारिज कराना पड़ता है।
हैवरा कोठी निवासी राजीव उर्फ पंपोला ने कहा कि अफसरों को चाहिए कि जनता की समस्या को समझकर जल्द समाधान किया जाए।
दो दिन पहले ही चार्ज लिया है। सैफई तहसील में जो भी राजस्व ग्राम हैं, उनके तहसील से जुड़े काम सैफई में ही होंगे। बैनामा का काम भी सैफई में हो इसके लिए जल्द आला अधिकारियों को अवगत कराकर निर्णय लिया जाएगा। - नमृता सिंह, एसडीएम सैफई।