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Etawah News: सात माह से आश्वासनों की छत पर ही गुजर बसर

Sun, 07 May 2023 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। सितंबर 2022 में हुई बारिश से ढहे कच्चे आशियानों में दबकर 10 लोगों की जान गई थी। इसके बाद
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प्रशासन की ओर से सभी को मुआवजे के साथ ही पक्के आशियाने दिलाने का भी वादा किया गया था, लेकिन पीड़ित सात माह से आस लगाए बैठे हैं। परिवारों की सुध तक लेने के लिए कोई नहीं गया।
21 सितंबर की रात आई आंधी और बारिश जिले में आफत बनकर आई थी। चार आशियाने उजड़ गए थे। इसमें दस लोगों की जान चली गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का जायजा लेकर सभी मृतकों और घायलों के परिजनों को आपदा फंड से मुआवजा दिलाने और जल्द ही सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया था। मृतकों के परिजनों को मुआवजा राशि तो मिल गई, लेकिन आवास नहीं मिल सके हैं। कोई पन्नी तो कोई फूस की झोपड़ी डालकर गुजर बसर कर रहा है।
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केस 1

चार मासूमों की मौत के बाद भी नहीं मिला आसरा इटावा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गांव चंद्रपुरा की बुजुर्ग शारदा देवी के बेटे और बहू की पहले ही मौत हो चुकी है। उनके पास गांव के एक कोने में जमीन तो पड़ी है, लेकिन उस पर घर बनाने के लिए पैसा नहीं है। 21 सितंबर 2022 की रात वह पड़ोसी के घर के बाहर कच्ची मड़ैय्या में पौत्र सिंकू (10), अभि (8), सोनू (7), पौत्री आरती (5) और ऋषभ (3) के साथ सो रही थीं। शारदा देवी और ऋषभ एक ही खाट पर सो रहे थे, जबकि बाकी चारों दूसरी चारपाई पर थे। तेज बारिश के बीच कच्ची मड़ैया गिर गई। इसमें सिंकू, अभि, सोनू और आरती की मौत हो गई। हादसे में शारदा और सबसे छोटा पौत्र ऋषभ मामूली रूप से घायल हुए थे। उस वक्त दोनों को आवास देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन सात माह बाद भी बुजुर्ग शारदा पौत्र के साथ पन्नी डालकर बसेरा बनाए हैं।



केस 2
कच्ची मड़ैया में जीवन काट रहा परिवार
इटावा। बकेवर के अंदाबा ग्राम पंचायत के मजरा बंगलन में कच्ची दीवार के पास रखा छप्पर 21 सितंबर को बारिश के दौरान गिर पड़ा था। उसमें रहने वाले जबर सिंह (50) की मौत हो गई थी। सूचना पर प्रशासनिक अधिकारियों ने पहुंचकर मृतक आश्रित परिजनों को आपदा मुआवजा की राशि और जल्द ही आवास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया था। इंतजार में सात माह बीत गए आज तक लाभ नहीं मिल सका। कच्ची मड़ैया में फूस की झोपड़ी डालकर आज भी परिवार रह रहा है। उनकी पत्नी संतोषी ओर तीन बेटे परिवार के साथ इसी फूस की झोपड़ी में रहते हैं। परिजन बताते हैं कि करीब 10 दिन से हो रही बारिश में फिर एक बार हादसे का डर सता रहा है।
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वर्जन
सभी को दिए गए आश्वासन पूरे किए जाएंगे। इस बार जो आवासों की सूची शामिल होगी, उनमें उक्त सभी लोगों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा। - दीनदयाल, डीडीओ
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