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Etawah News: प्लेटलेट्स कम होने पर रेफर करते मरीज

Thu, 22 Jun 2023 11:53 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो संख्या 12 सीएमओ डॉ.गीताराम। संवाद
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फोटो संख्या 13 डॉ.अजय शर्मा। संवाद
फोटो संख्या 14::::जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक। संवाद

जिला अस्पताल का ब्लड बैंक सालों से कर रहा मशीन देने की मांग
डेंगू और मलेरिया फैलने पर बड़ी संख्या में मरीजों की होती हैं प्लेटलेट्स कम

संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिला अस्पताल में भले ही 20 वर्षों से ब्लड बैंक है, लेकिन मशीनें आज तक पूरी नहीं मिल सकी हैं। सालों से मांगी जा रही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन आज तक नहीं मिल सकी है। ऐसे में प्लेटलेट्स कम होने पर शहर के मरीजों को लेकर तीमारदार सैफई मेडिकल कॉलेज तक दौड़ लगाते हैं। सैफई में मशीन खराब होने पर मरीजों को आगरा या कानपुर ले जाना पड़ता है।
बारिश के मौसम ने दस्तक दे दी है। इस वजह से न सिर्फ संक्रामक रोग बढ़ जाते हैं, बल्कि डेंगू और मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। मच्छर जनित दोनों बीमारियों की चपेट में आए मरीजों की प्लेटलेट़्स बहुत तेजी से कम होती हैं। रिकवरी न होने की स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़वाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में शहर या आसपास के गांवों से मरीजों को लाने वाले तीमारदारों को जिला अस्पताल आने के बाद निराशा हाथ लगती है। यहां व्यवस्था न होने की वजह से मरीज को सैफई मेडिकल ले जाना पड़ता है। यहां मरीज के भर्ती होने पर तीमारदारों को आने जाने से लेकर तमाम अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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सिर्फ किट से हो पाती है डेंगू की जांच::: बारिश का दौर थमते ही डेंगू के मरीज मिलने लगते हैं। इस बार तो डेंगू के मरीज फरवरी तक निकले। जिला असपताल में अलग से डेंगू वार्ड बनाया जाता है, लेकिन जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में डेंगू की जांच किट से होती है। पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर डेंगू की कंफर्म जांच के लिए सैंपल सैफई मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। ऐसे में मरीज व उनके तीमारदार को डेंगू की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करते हैं। जांच रिपोर्ट में देरी होने की वजह से मरीज की इलाज चलने के बावजूद प्लेटलेट्स लगातार घटती रहती है। जो जान पर बन आती है।
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पिछले साल जिले में मिले थे तीन सौ डेंगे के मरीज::: पिछले साल जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में किट से हुई डेंगू जांच में करीब 300 मरीज पॉजिटिव मिले थे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू के 104 पॉजिटिव मरीज मिले। इसे लेकर छह सदस्यीय केंद्रीय डॉक्टरों की टीम ने जिला अस्पताल का निरीक्षण तक करना पड़ा था।


एक यूनिट से तीन मरीजों को मिलता है लाभ
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ.अजय शर्मा ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ब्लड के तीन भाग करती है। एक ही बोतल से तीन मरीजों को लाभ मिलता है। पहला प्लाज्मा, दूसरा प्लेटलेट्स और तीसरा पीआरबीसी ( पैक्ट रेड ब्लड सेल)। बताया कि प्लाज्मा प्रोटीन है। हादसे के दौरान बड़ी मात्रा में खून निकलने की स्थिति में प्लाज्मा चढ़ाया जाता है। प्लेटलेट्स डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स लगातार घटने और 50 हजार से नीचे प्लेटलेट्स होने की स्थिति में चढ़ाई जाती है मलेरिया के मरीजों को भी प्लेटलेट्स चढ़ानी पड़ता है। पीआरबीसी खून की कमी होने पर होल ब्लड चढ़ाया जाता है।
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वर्जन
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन की जिला अस्पताल में जरूरत तो है। मशीन लगाने की डिमांड शासन को पहले भेजी जा चुकी है। दोबारा फिर भेजेंगे। डॉ.गीताराम, मुख्य चिकित्साधिकारी
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