इटावा। पासपोर्ट बनवाने के लिए कानपुर तक दौड़ न लगानी पड़ी, इसके लिए पूरी कवायद के बाद भी तीन साल में पासपोर्ट कार्यालय शुरू नहीं हो सका। लोगों का कहना है कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की हीलाहवाली के कारण उन्हें पासपोर्ट बनवाने के लिए कानपुर तक दौड़ लगानी पड़ती है।
जिले के लोगों को पासपोर्ट बनवाने के लिए तिथि मिलने के बाद भी कानपुर के दो से तीन बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें समय के साथ ही अतिरिक्त रुपये भी खर्च करने पड़ते हैं। इन सब परेशानियों के बीच चुनावी माहौल के बीच सांसद ने जिले में ही पासपोर्ट कार्यालय बनवाने की घोषणा की थी। इसके बाद तीन साल पहले शासन से अनुमति मिलने के बाद जमीन की तलाश शुरू की गई। इस दौरान शास्त्री चौराहे स्थित प्रधान डाकघर में भी जगह तलाशी गई।
कोई अच्छी व्यवस्था न मिलने पर उस समय के डाकघर अधीक्षक ने अधीक्षक आवास देने की बात कही। इस पर बात बन गई और अधीक्षक शहर में ही किराये पर रहने लगे। अधीक्षक आवास को करीब एक साल तक डेंटिंग पेंटिंग और अन्य व्यवस्था करके तैयार तो कर लिया गया, लेकिन इसमें पासपोर्ट दफ्तर आज तक शुरू नहीं हो सका। इसके बाद से कार्रवाई के लिए फाइल धूल फांक रही है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधयों की कमजोर पैरवी और अधिकारियों की शिथिलता की वजह से इतना लंबा समय लग रहा है।
हर माह लगभग 250 लोग बनवाते हैं पासपोर्ट
जिले में बड़े व्यवसायी और राजनीतिक घराने के लोग होने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों का विदेशों से आना-जाना रहता है। लगभग हर माह 250 लोग पासपोर्ट बनवाने के लिए कानपुर तक दौड़ लगाते हैं। पासपोर्ट कार्यालय की घोषणा होने के बाद लोगों में खुशी की लहर दौड़ी थी, लेकिन अब लोगों में निराशा है।
लोगों ने बताई समस्या
शशांक ने बताया कि हाल में उन्होंने बेटी का पासपोर्ट बनवाया है। कार्यालय जिले में न होने की वजह से दो बार कानपुर तक दौड़ लगानी पड़ी। व्यस्तता के बीच दो दिन कानपुर जाने से परेशानी भी हुई।
कंचन मिश्रा ने बताया कि जिले में पासपोर्ट ऑफिस खुलने की जानकारी पर खुशी हुई थी। लगा था कि अब यहीं से सारा काम हो जाएगा लेकिन दो साल तक पासपोर्ट कार्यालय न खुल पाने पर आवेदन किया और कानपुर में जाकर पासपोर्ट बनवाया।
एडीएम जयप्रकाश ने बताया कि जल्द ही प्रयास करके पासपोर्ट दफ्तर खुलवाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।