इटावा। सड़क निर्माण में एक नया प्रयोग होने जा रहा है। जिले की तीन सड़कों को रूस के केमिकल की मदद से तैयार किया जाएगा। अभी ऐसी सड़कें केरल और तमिलनाडु में ही बन रही थीं। अब यूपी के हर जिले में बनाने की तैयारी है। पीएनटी नाम के इस केमिकल से बनने वाली सड़क न सिर्फ मजबूत और टिकाऊ होगी बल्कि लागत भी कम होगी। बार-बार सड़क बनने से इनकी ऊंचाई बढ़ने की समस्या भी दूर होगी। इन तीन मॉडल सड़कों को बनाने की जिम्मेदारी ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को दी गई है। काम शुरू भी हो चुका है।
महेवा से अछल्दा (औरैया), निवाड़ीकला से नगला मोतीराम और इटावा-भरथना से समसपुर होते हुए बकेवर तक की सड़क को इस विधि से बनाने के लिए चुना गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 26.05 किलोमीटर है और इन्हें बनाने के लिए 27.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन सड़कों को नए सिरे से बनाया जाएगा।
इसके लिए पहले जर्जर हो चुकी सड़क को जेसीबी से खोदा जाएगा। मलबे के डब्ल्यूआर मशीन में लगे रोटावेटर जैसे यंत्र की मदद से छोटे-छोटे टुकड़े किए जाएंगे। अब इस मलबे में चार प्रतिश्सड़क पर बिछा देगी। इसके बाद इस पर पीएमसी की 40 एमएम मोटी परत बिछाई जाएगी। इसी के साथ सड़क बनकर तैयार हो जाएगी।
अभी किसी सड़क को बनाने के लिए पहले गिट्टी की दो परतों और फिर स्टोन डस्ट बिछाकर रोलिंग की जाती है। इसके बाद पीएमसी की परत बिछाई जाती है। इस काम को करने में लंबा समय लग जाता है। इसके अलावा यातायात बाधित रहता है, जबकि नई तकनीकी से बनने वाली सड़क को कम समय में तैयार कर लिया जाता है। लागत भी कम आती है। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यदि एक किलोमीटर लंबी सड़क को गिट्टी बिछाकर बनवाया जाए तो लागत करीब 70 लाख रुपये आती है। बनने में करीब 15 दिन का वक्त लग जाता है। जबकि नई तकनीकी से बनने वाली सड़क को एक हफ्ते में तैयार कर लिया जाता है। लागत भी करीब 10 से 15 लाख रुपये कम होती है।
गिट्टी डालकर जितनी बार सड़क बनती है उतनी बार इसकी ऊंचाई बढ़ती जाती है। एक समय ऐसा आता है, जब सड़क किनारे स्थित मकानों के लेवल से सड़क की ऊंचाई ज्यादा हो जाती है। बारिश के दिनों में पानी इन घरों में भरने लगता है। खाली जगह पर जलभराव होने से मकानों में सीलन और आवागमन में समस्या होने लगती है। नई तकनीकी से सड़क बनने से ऊंचाई नहीं बढ़ेगी और सड़क की खुदाई से निकलने वाले मलबे का दोबारा इस्तेमाल हो जाएगा। इससे गिट्टी की खरीद और इसके परिवहन पर होने वाला खर्च बचेगा। लेबर कास्ट भी कम होगी।
सड़क लंबाई लागत
महेवा से अछल्दा- 10.45 किमी 14.34 करोड़
निवाड़ीकला से नगला 05 किमी 3.97 करोड़
मोतीराम
इटावा-भरथना से बकेवर 10.60 किमी 8.93 करोड़
महेवा-अछल्दा में बन रही सड़क का सैंपल लैब में जांचा गया है। पिछले महीने राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क अभिकरण (एनआरआरडीए) के क्वालिटी मॉनिटर ने सड़क का सैंपल लिया था। इसका शहर की लैब में परीक्षण किया गया। कोर (सड़क को काटकर लिया गया सैंपल) को मशीन पर रखकर इस पर दबाव डाला गया। जो 6.2 मेगापास्कल निकला। जबकि मानक के मुताबिक अगर दबाव चार से ज्यादा है तो इसे अच्छा माना जाता है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जेई ऋषि प्रताप सिंह ने बताया कि इस सड़क पर यदि 20 टन से ज्यादा वजन का भी वाहन गुजरेगा तो कोई समस्या नहीं आएगी।
रूस के केमिकल से जिले की तीन सड़कों को बनाने पर काम शुरू हुआ है। महेवा से अछल्दा तक की सड़क पर काम तेजी से चल रहा है। इसी महीने के अंत तक इस पर फाइनल कोटिंग कर दी जाएगी। एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) के तहत इन सड़कों को बनाया जा रहा है। इससे सड़क की ऊंचाई नहीं बढ़ेगी और साथ ही कम समय और कम लागत में अच्छा काम होगा। - सुरेंद्र सिंह, अवर अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग।