इटावा। जगत के पालनहार भगवान विष्णु कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निद्रा से जागेंगे। इसी दिन से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इसे देवोत्थानी एकादशी भी कहा जाता है। नवंबर और दिसंबर में विवाह के 11 मुहूर्त हैं। इनमें चार नवंबर और सात दिसंबर में हैं।
चौगुर्जी स्थित सिद्धपीठ प्राचीन शिव मंदिर के आचार्य भुवनेश मिश्रा ने बताया कि एकादशी पर अबूझ मुहूर्त होता है। लेकिन शुक्र के 23 नवंबर तक अस्त होने की वजह से इसके बाद ही मांगलिक कार्य होंगे।
निबाड़ीकला के आचार्य पंडित विनोद कुमार दुबे ने बताया कि इस तिथि के अगले दिन द्वादशी को तुलसी विवाह किया जाता है। बताया तीन नवंबर को शाम 7:30 बजे एकादशी शुरू होगी, जो चार की शाम 6:08 बजे तक रहेगी। इस बीच पूजा अर्चना करने से विशेष फल प्राप्त होगा।
इस बार कम मुहूर्त
भागवताचार्य राम जी पांडे ने बताया कि देवोत्थान एकादशी से वैवाहिक कार्य शुरू हो जाते हैं। नवंबर में 25, 26, 28 और 29 तारीखें शुभ हैं। जबकि दिसंबर में एक, दो, चार, सात, आठ और नौ और 14 तारीखें शुभ हैं। इस बार कम मुहूर्त हैं।
एकादशी व्रत से सौ राजसूय यज्ञ का फल मिलता
ज्योतिषाचार्य राजीव अग्रवाल ने बताया कि ये चतुर्मास की चार महीने की अवधि के अंत का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु को तिलक लगाएं, फल चढ़ाएं। नए वस्त्र अर्पित करें और मिष्ठान का भोग लगाएं। एकादशी की कथा सुनें, भगवान विष्णु की आरती करें। एकादशी व्रत का फल 100 राजसूय यज्ञ तथा एक सहस्र अश्वमेध यज्ञ के फल के बराबर होता है। श्रद्धा के साथ जो लोग जप-तप और स्नान-दान करते हैं, वह सब अक्षय फलदायक हो जाता है। इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है।