इटावा। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष पांडे ने 14 साल पुराने मारपीट के मामले की सुनवाई कर चार लोगों को दोषी पाया। इन्हें एक-एक साल की सजा सुनाई है।
अभियोजन अधिकारी योगेश त्रिवेदी ने बताया कि जसवंतनगर थानाक्षेत्र के गांव शाहजहांपुर निवासी राजपाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि वह भाई अतर सिंह व पत्नी मुनीषा देवी के साथ नौ फरवरी 2009 को खेत में पानी लगा रहा था। तभी बंटवारे के विवाद में महेश चंद्र , सतीश चंद्र व भूरे सिंह, रामलली लाठी-डंडे लेकर पहुंचे और गालीगलौज करने लगे। विरोध करने पर मारपीट की। जब भाई व पत्नी बचाने आईं तो मारपीट कर दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की विवेचना की और आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए।
मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में हुई। अभियोजन अधिकारी की ओर से पेश किए गवाह व साक्ष्यों के आधार पर चारों को एक-एक साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने उन्हें परिवीक्षा का लाभ देते हुए 20-20 हजार की जमानत पर छोड़ दिया।
चेक बाउंस होने पर एक साल की सजा
इटावा। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष पांडे ने आठ साल पुराने चेक बाउंस के मामले में दोषी को एक साल की सजा व चार लाख के जुर्माने से दंडित किया।
अभियोजन अधिकारी योगेश त्रिवेदी ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला साबितगंज निवासी साजदा रहमान पत्नी मोहम्म्द अशरफ ने वर्ष 2015 में जालौन जिले के रामपुरा निवासी सलीम को दो लाख रुपये उधार दिए थे। जब उसने रुपये वापस मांगे तो सलीम ने एक-एक लाख के दो चेक दे दिए। साजदा ने चेक बैंक में लगाए तो बाउंस हो गए। साजदा ने इसकी शिकायत की तो सलीम ने दोबारा चेक दिए। बाद में यह चेक भी बाउंस हो गए। उसके बाद साजदा ने शिकायत की। साजदा के प्रार्थनापत्र पर कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने सलीम को दोषी पाया और सजा सुनाई। (संवाद)