फोटो 02::::::ग्राम पंचायत असवा में गांव मुखिया की ठार को जाने वाला बदहाल रास्ता। संवाद
फोटो 03:::::गांव मुखिया की ठार में लगे खंभे पर झूलते तार। संवाद
- ग्राम पंचायत असवा के मुखिया के ठार गांव के 20 परिवार अंधेर में कट रहे जिंदगी
- गांव को जाने वाला दो किलोमीटर का रास्ता भी कच्चा, बारिश में हो जाता है दलदल
संवाद न्यूज एजेंसी
उदी। सरकार की ओर से गांव-गांव तक बिजली और सड़क पहुंचाने के दावे भले ही किए जाते हों, लेकिन जिले में अभी भी एक ऐसा गांव है जहां तीस साल में न तो बिजली पहुंची है और न ही इस गांव में और गांव मुख्य मार्ग की सड़क बनी है। बिजली न होने से जहां आम जनजीवन अस्त व्यस्त है। वहीं रास्ता कच्चा होने से बारिश के दिनों में स्कूल के वाहन और एंबुलेंस तक आने से इंकार कर देते हैं।
बढपुरा बिकास खंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत असवा में नाम मुखिया की ठार गांव है। यह करीब 1996 में बस गया था। यहां 20 घरों में करीब सौ लोग रहते हैं। इसके बावजूद इस गांव को आज तक न बिजली नसीब हो सकी और न यहां की सड़कें बन सकीं।
सौभाग्य योजना के तहत यहां करीब तीन साल पहले बिजली विभाग की ओर से खंभे लगा दिए गए, उन पर तार भी बिछा दिए गए, लेकिन आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में लोगों का आम जनजीवन अस्त व्यस्त है। लोग आसपास के गांवों से तार खींचकर बिजली का जुगाड़ करते हैं तो वहीं कुछ लोग आज भी लालटेन में जिंदगी गुजार रहे हैं। वहीं गांव की ओर से जाने वाली मुख्य सड़क ही आज तक नहीं बनी है।
कच्चा रास्ता बारिश के दिनों में यहां के लोगों के लिए मुसीबत बनता है। बारिश के दिनों में कीचड़ हो जाने से न बच्चों को लेने वाहन आते हैं और न ही गांव तक एंबुलेंस। बीमार होने पर इसी कीचड़ के बीच ग्रामीण ठेलों और रिक्शों से किसी तरह अस्पताल तक ले जाते हैं।
गांव के संजू यादव, प्रमोद सिंह, अखिलेश सिंह, कल्लू यादव, पप्पू सिंह, दूरबीन सिंह, इंदर सिंह, भूरे सिंह, महेश आदि का कहना है कि चुनावों में तो सब आते हैं। बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन उसके बाद पलटकर कभी सुध लेने नहीं आते हैं।
प्रधान रामखिलाड़ी राजपूत ने बताया कि मुखिया की ठार हमारे मौजे में पड़ता है। असवा गांव से मुखिया ठार तक जाने के लिए कच्चा रास्ता व्यवस्थित हमारी ओर से कराया गया था। यह रास्ता सरकारी नहीं है। यह ठाकुरों के गांव के बीच से रास्ता निकलता है।
ऐसे में वह विरोध करके सड़क नहीं बनने देते हैं। क्योंकि मुखिया की ठार गांव पूरा यादवों का है। वहीं बिजली को लेकर बताया कि खंभे और तार तो बिछाए गए हैं, लेकिन आपूर्ति नहीं दी जा रही है। इसे लेकर अधिकारियों से कई बात हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।
ग्रामीण बोले जिंदगी में 30 से नहीं हुआ उजाला
फोटो 04- गांव के संजीव यादव का कहना है कि हमारा गांव करीब तीस वर्षो से यहां बसा हुआ हूं। तब से यहां पर न तो कोई विकास हुआ है और न ही किसी को सरकारी योजना का लाभ मिला है। गांव में बिजली नहीं है। अंधेरे में रात गुजारनी पड़ती है। गांव तक आने जाने के कच्चा रास्ता है, जो बारिश में कीचड़ मे तब्दील हो जाता है। एक ऐसा गांव है। इसमें ना तो बिजली की व्यवस्था है और न ही सड़क बनी है।
फोटो 05-गांव के रनवीर सिंह ने बताया कि ग्राम असवा से हमारा गांव दो किलोमीटर पड़ता है। कच्चा रास्ता है। कोई वाहन न आने की वजह से गांव से बच्चे दो किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं। अगर सड़क बन जाए तो बच्चों का भविष्य बन जाएगा। गांव में बिजली की सुविधा भी तीस साल में नहीं मिली है। तार और खंभे शोपीस बने हुए हैं।
वर्जन
एक्सीएन द्वितीय एसके मिश्रा ने बताया कि ऐसा मामला संज्ञान में नहीं है। यदि वहां खंभे और लाइनें बिछी हैं तो बिजली आपूर्ति भी जानी चाहिए। हो सकता है लोगों ने वहां कनेक्शन न लिए हों इसलिए आपूर्ति कटी हो। इस समस्या का समाधान जल्द कराया जाएगा।