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इटावाः सिरसा में डेंगू से वृद्ध की मौत, 24 बुखार से पीड़ित

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सिरसा में ड्रम में डेंगू मच्छर का लार्वा चेक करते मलेरिया इंस्पेक्टर आशीष राणा। संवाद - फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। नवंबर का आधा महीना बीतने के बावजूद डेंगू का प्रकोप जानलेवा होता जा रहा है। बुधवार को सैफई मेडिकल कॉलेज में डेंगू का इलाज करा रहे ग्राम सिरसा निवासी 65 वर्षीय सरमन सिंह की मौत हो गई। जबकि गांव में करीब 24 लोग तेज बुखार से पीड़ित चल रहे हैं। सीएचसी राजपुर में उन्हें इलाज के नाम पर कुछ गोलियां देकर टरका दिया जा रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों को प्राइवेट इलाज कराना पड़ रहा है।
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मृतक सरमन सिंह के पुत्र रामकेश यादव ने बताया कि वह बीमार पिता को लेकर 11 नवंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर गए थे। डॉक्टरों ने एंटीजन टेस्ट कराया पर डेंगू न होने की बात कहकर वायरल की दवा दी। हालत में सुधार न होने पर सीएससी राजपुर से रेफर करा कर सैफई मेडिकल कॉलेज ले गए थे।
आरोप है कि सैफई के चिकित्सकों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज चालू कर दिया पर बाद में हुई जांच में डेंगू की पुष्टि हो गई। डॉक्टर ने जब तक डेंगू का इलाज शुरू तब तक पिता की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। इसी कारण बुधवार को उनकी मौत हो गई।
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रामकेश यादव ने सीएचसी के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। बताया डॉक्टरों की लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री को भेजी है।
वहीं, जिला मलेरिया विभाग के निरीक्षण आशीष राणा ने बताया कि सिरसा गांव में करीब 24 ग्रामीण तेज बुखार से पीड़ित हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी से बचा जा सके।
सीएचसी, राजपुर के अधीक्षक डॉ. अजय विक्रम ने कहा कि अस्पताल में बुखार के मरीजों का डेंगू के लक्षण होने पर एंटीजन टेस्ट किया जाता है। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल या सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
डेंगू का कोई पक्का इलाज नहीं है: मलेरिया इंस्पेक्टर
जिले में डेंगू के लेकर क्या हालात हैं इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के लोग भी हकीकत बयां कर रहे हैं। मलेरिया विभाग के निरीक्षक आशीष राणा का एक वीडियो वायरल हुआ है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी इसकी पुष्टि नहीं करती है। वीडियो में कहते दिख रहे हैं कि जिले के अंदर डेंगू का कोई भी पक्का इलाज नहीं है। वायरल फीवर के आधार पर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। उन्हें मेडिसिन दी जा रही है। अस्पतालों में किसी प्रकार की डेंगू के उपचार की व्यवस्था नहीं है।
12 बेड का शिशु डेंगू वार्ड फुल, नौ मरीज और मिले
इटावा। गुरुवार को जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में 31 मरीजों की किट से हुई जांच में नौ डेंगू मरीज मिले। जबकि 12 बेड का शिशु डेंगू वार्ड फुल हो चुका है। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में 12 बच्चों समेत 26 मरीज भर्ती हैं। जबकि गुरुवार को आठ मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। डेंगू मरीजों का उपचार करने वाले डॉ.अजय शर्मा ने बताया कि गुरुवार को 22 मरीज भर्ती थे, इनमें से आठ को डिस्चार्ज कर दिया है। (संवाद)

सरमन सिंह फाइल फोटो। संवाद- फोटो : ETAWAH

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