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Etawah News: सरकारी केंद्रों पर नियम कड़े, दाम कम, आढ़तों की ओर बढ़े कदम

Thu, 13 Apr 2023 12:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इटावा। गेहूं क्रय केंद्र खुले 12 दिन बीतने के बावजूद जिले में मात्र एक केंद्र पर बुधवार को 40 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। अन्य कहीं भी बोहनी नहीं हो सकी है। जबकि शहर, जसवंतनगर और भरथना की मंडी में आढ़तों पर करीब 300 क्विंटल गेहूं खरीद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि उन्हें गेहूं का दाना पतला होने और अन्य मानकों का हवाला देकर केंद्रों से लौटाया जा रहा है। जबकि आढ़त में तत्काल खरीद और भुगतान हो जाता है।
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शहर की नई मंडी में करीब 15 दिन में 30 हजार से अधिक बोरी गेहूं आढ़त पर आ चुका है। बुधवार को मंडी का भाव 2100 रुपये प्रति क्विंटल रहा। जसवंतनगर में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं का भाव 2125 रुपये है, लेकिन आढ़त पर 100 रुपये अधिक मिल रहे हैं। क्रय केंद्रों पर ामानकों की अड़ंगेबाजी के कारण किसान वहां गेहूं लेकर नहीं जा रहे हैं। यहीं वजह है कि बुधवार तक मात्र सिरसा केंद्र पर 40 क्विंटल गेहूं खरीदा गया है। दूसरी ओर आढ़त पर गेहूं के ढेर लगे हैं। एक अनुुमान के अनुसार तीनों मंडियों में अब तक 50 हजार बोरी गेहूं आ चुका है। एक बोरी में 60 किलो गेहूं होता है।


केस- 1
आढ़त पर मिले ज्यादा दाम
गांव पाठकपुरा के किसान महेश चंद्र व सरमन सिंह ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर गए थे, लेकिन गेहूं का दाना पतला बता दिया गया। मजबूरन आढ़त पर गेहूं बेचना पड़ा। सरकारी भाव से ज्यादा पर गेहूं बेचा है। केंद्र पर नियम कड़े और दाम आढ़त से कम हैं।
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केस- 2
कागजी कार्यवाही में देरी से होती परेशानी
गांव नगला हरे के किसान हरविलास ने बताया कि वह क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर इसलिए नहीं जा रहे हैं क्योंकि वहां कागजी कार्यवाही ज्यादा करना होती है। बेचने पर चेक मिलती है, लेकिन भुगतान में देरी होती है। आढ़त पर तत्काल भुगतान हो जाता है। मानकों का फेर नहीं होता।

केस 3
आढ़त पर बेचा, भुगतान भी हो गया
गांव भवानीपुर (वैवाह) के किसान मेहरबान सिंह ने बताया कि क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के बाद भुगतान के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। आढ़त पर 25 क्विंटल गेहूं बेचा है। तौल कराने के बाद भुगतान भी हो गया। पिछले साल उन्हें सरकारी केंद्र से लौटा दिया था।

केस 4
नमी की बात कहकर लौटाया था
गांव नगला मोहन के किसान कैलाश बाबू ने बताया कि सरकारी केंद्र पर मानक पूरे करने व भुगतान मिलने में समस्या आती है। परिवार की जरूरत पूरी करने के लिए फसल आढ़त पर बेचने से भुगतान हो जाता है। पिछले सप्ताह गेहूं में नमी होने की बात कहकर लौटा दिया था।
इन्होंने भी बताई पीड़ा
चौपुला के किसान राहुल ने बताया कि छह अप्रैल को गेहूं का सैंपल लेकर क्रय केंद्र गए थे। केंद्र प्रभारी ने गेहूं पतला बताया। करीब 35 क्विंटल गेहूं है, बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। क्रय केंद्र पर नहीं बिकेगा तो आढ़त पर बेचना पड़ेगा।
गांव कांधनी के किसान पवन कुमार ने बताया कि 10 अप्रैल को गेहूं का नमूना लेकर गए थे। प्रभारी ने बताया कि जितनी जमीन है, उतना ही गेहूं खरीदेंगे। हमारे पास ढाई बीघा खेत है। इसमें से करीब 10 क्विंटल गेहूं निकलेगा। अन्य करीब 120 क्विंटल गेहूं बटाई का है। प्रभारी कह रहे हैं कि जिसका खेत है उसी की खतौनी से पंजीकरण कराना होगा। सारा गेहूं एक ही जगह बेचेंगे।

अब तक 355 किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। गेहूं की कटाई चल रही है। जल्द ही क्रय केंद्रों पर गेहूं आने लगेगा। अभी क्रय केंद्रों की उनके पास शिकायतें नहीं आईं हैं। अगर किसानों को क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने में परेशानी हो रही हो, वह 7007617009 पर संपर्क कर सकते हैं। - लालमणि पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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