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नहरों और रजवाहों में पानी न होने से बढ़ीं किसानों की मुश्किलें

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इटावा। सूखी पड़ीं नहरों और रजबहों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धान कटाई के बाद खाली खेतों में जिन किसानों ने गेहूं, आलू, चना, मटर और सरसों की बुआई कर दी है, उन्हें पहली सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। जबकि कई जगह किसान पलेवा के लिए पानी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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बुआई के 20 दिन बाद गेहूं की फसल को पानी लगाया जाता है। आलम यह है कि जनपद के कुछ क्षेत्रों में नहरें और रजबहा सूखे पड़े हैं। जेसीबी से बंबों की सफाई हो रही है। जिसकी आखिरी मियाद एक दिसंबर है। ऐसी स्थिति में दिसंबर में ही नहरों में पानी छोड़े जाने के आसार नजर आ रहे हैं।
जनपद में इटावा खंड की 109 व भोगनीपुर खंड की 104 नहरें, रजबहा, माइनर व बंबे हैं। इनकी कुल लंबाई 488.729 किलोमीटर है। इनमें इटावा शाखा की 302.08 व भोगनीपुर शाखा की 180.10 किलोमीटर हैं। जबकि 6.54 किलोमीटर औरैया जनपद की नहर पड़ती है। नहरों और बंबों में छह अक्तूबर से सफाई चल रही है। ऐसी स्थिति में सिंचाई का रोस्टर जारी करने में अभी और समय लग सकता है।
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ताखा ब्लॉक क्षेत्र के गांगसी व बासक रजबहों का पानी करीब एक महीने से बंद है। अभी तक सफाई का काम शुरू नहीं हो सका है।
जसवंतनगर में भोगनीपुर गंग नहर सूखी पड़ी है। आलू, गेहूं आदि की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। करीब 20 किलोमीटर क्षेत्र में भोगनीपुर नहर बलरई से जगसोरा, महलुपुर आदि गांवों से होकर निकलती है। लगभग पांच हजार से ज्यादा किसानों फसलों की सिंचाई के लिए इसी नहर पर पूरी तरह से आधारित हैं।
बिलंदा रजबहा सूखा
बसरेहर। कस्बा में बिलंदा रजबहा भी सूखा पड़ा है। इससे ग्राम बनकटी से सिरसा माइनर निकलती है। सिरसा माइनर की पुलिया भी जाम हो गई है। अभी तक सफाई नहीं हुई है। ग्राम नगला छति के किसान अखिलेश चौहान और सवी चौहान का कहना है कि वह गेहूं की बुआई कर चुके हैं। 20 दिन बाद सिंचाई की जरूरत पड़ेगी। अभी सफाई होने से रजबहा में पानी छोड़ने में समय लगेगा। समय से पानी न मिलने से फसल बर्बाद होने की आशंका है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नरेंद्र कुमार ने कहा कि सिल्ट सफाई चल रही है। इसके बाद ही सिरसा माइनर में पानी छोड़ा जाएगा। (संवाद)
जेसीबी से हो रही बंबों की सफाई
भरथना। रबी की फसलों के लिए टेल तक पानी पहुंचाने के लिए ग्राम कुंअरा बंबा की जेसीबी से सफाई कराई जा रही है। लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबे बंबा किनारे कुंअरा, नगला हंसे, नगला नृपत, मोढ़ा देव आदि गांव की करीब हजारों बीघा जमीन सिंचित होती है। अधिशासी अभियंता के अनुसार टेल तक पानी पहुंचाने के लिए बंबों की सफाई कराई जा रही है। इसके बाद ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। (संवाद)
किसानों ने बताई समस्या
जसवंतनगर के जगोरा गांव निवासी सनी यादव ने बताया कि नहर किनारे बसे गांव में किसानों की खेती है। लिहाजा उनकी फसलों की नहर के पानी से सिंचाई होती है। हालत यह है कि करीब एक महीने से नहर से पानी नहीं है, जिससे किसान परेशान है।
बसरेहर के नगला छति गांव निवासी किसान अखिलेश चौहान ने बताया कि उन्होंने भी गेहूं की फसल की है। बुआई के समय किराये पर पानी लेना पड़ा था। उम्मीद थी कि रजबहा में पानी आ जाएगा लेकिन कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद रोस्टर जारी होगा
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि सिंचाई का रोस्टर बन चुका है, जिसे सीडीओ और फिर जिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद जारी कर दिया जाएगा। फिलहाल एक दिसंबर तक सिल्ट सफाई का काम चलेगा।
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