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Etawah News: स्टोर में सामान नहीं, थम गए 22 बसों के चक्के

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इटावा। रोडवेज विभाग के स्टोर में बसों की मरम्मत का सामान नहीं है। इसके कारण 22 बसों के चक्के थम गए हैं। 20 नवंबर को सामान की लिस्ट भेजी गई थी। इसमें आधा सामान भी नहीं मिला है। कोहरे को देखते हुए मजबूरी में करीब 15 चालकों ने अपने पैसों से बसों में फॉग लाइटें लगवाईं हैं। कई बसें बिना फॉग लाइट, टूटे शीशों के साथ चल रही हैं तो किसी में वायरिंग खुली पड़ी है।
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इटावा डिपो से इस समय 71 बसों का संचालन हो रहा है। इनमें 22 बसें शनिवार को मरम्मत के लिए रोडवेज विभाग के स्टोर में खड़ी मिलीं। इनमें वायरिंग, इंडीकेटर, हेडलाइट, पार्किंग लाइट, स्विच, बैकलाइट, असेंबली आदि की समस्या है। इन्हें ठीक करने के लिए सामान नहीं है। यही कारण है कि कानपुर, फर्रुखाबाद, आगरा, मैनपुरी आदि रूटों पर चलने वली यह बसें संचालित नहीं हो पा रही हैं। शनिवार को इन रूटों पर आधी संख्या में ही बसों का संचालन हुआ। इससे यात्रियों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं रोडवेज बस अड्डे पर सैफई डिपो की बस संख्या यूपी-84 टी-4794 में वायरिंग खुली पड़ी थी। आगे का शीशा चटका था। फर्स्ट एड बॉक्स तक बस में नहीं था। इन सबके बाद भी बस सवारियां भरने के लिए इटावा बस स्टैंड पर खड़ी थी। चालक जयपाल ने बताया कि बस की हालत कैसी है इसकी जानकारी सबको है। चलाने को दी गई है तो वह लेकर जा रहे हैं।
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इसी तरह शिकोहाबाद डिपो की बस संख्या यूपी-83 एटी-4620 में फॉग लाइट नहीं थी। वायरिंग खुली थी। चालक राजेश ने बताया कि वर्कशॉप में ही फॉग लाइट नहीं है। कई लोगों ने तो अपने पैसों से लाइटें लगवाई हैं। जब आ जाएंगी तो लगवा लेंगे। बस स्टैंड पर दोपहर करीब डेढ़ बजे खड़ी 10 बसों में छह में फॉग लाइट नहीं थी।
ये सामान मंगाया गया
वर्कशॉप में बिजली सेक्शन के इंचार्ज यज्ञनारायण ने बताया कि 20 नवंबर को स्टोर से सामान भेजने के लिए मांग भेजी गई थी। उन्हें 50 टू-वे स्विच, 500 मीटर वायर, 30 पीस पीवीसी ब्लैकटेप, 30 होल्डर, 15 मेनलाइट स्विच, 40 बैकलाइट, 40 इंडीकेटर, 30 ब्रेक स्विच, 20 स्टीयरिंग स्विच, 10 डिपर स्विच और कुछ अन्य सामान की डिमांड 20 नवंबर को स्टोर में भेजी थी। अभी तक आधा सामान भी नहीं मिला है।
14 अच्छी बसें लेकर दे दीं कंडम
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या को कम करने के लिए रोडवेज विभाग वहां के लिए फिट बसें ही चला रहा हैं। पिछले हफ्ते जिले की पांच बसें मेरठ और नौ बसें सहारनपुर भेजी गईं हैं। इतनी ही संख्या में इन जिलों से कंडम बसें यहां भेज दी गई हैं। जिनकी वर्कशॉप में मरम्मत चल रही है।
28 की उम्र पूरी, फिर भी दौड़ रहीं
डिपो की 71 में 28 बसें ऐसी हैं जो उम्र पूरी करने के बाद भी दौड़ रही हैं। विभाग ने इन्हें कंडम घोषित कर दिया है लेकिन नई बसें न मिलने के कारण इनसे अभी भी काम लिया जा रहा है। विभाग के मानकों के मुताबिक, 10 साल या फिर 12 लाख किलोमीटर चल चुकी बसों को कंडम घोषित करने का नियम है। लेकिन यहां अभी भी 28 बसों से काम लिया जा रहा है। जूनियर फोरमैन मूलशंकर गुप्ता ने बताया कि इसी महीने आठ बसें कटने के लिए चली जाएंगी। नई बसों के आने की संभावना है।
यह सही है कि वर्कशॉप में सामान की कमी है। इसके लिए डिमांड भेजी जाती है और स्टोर से उपलब्धता के हिसाब से सामान भेजा जाता है। 22 बसें अभी स्टोर में खड़ी हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द सामान मंगाकर इनकी मरम्मत करा दी जाए। ज्यादातर बसों में वायरिंग और लाइट से जुड़ी समस्याएं हैं। - ओमप्रकाश, सीनियर फोरमैन, रोडवेज वर्कशॉप।
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