फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला अस्पताल: रात में ढूंढते रहो डॉक्टर को, मिलेंगे नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
इटावा। नोडल अधिकारी और कमिश्नर के निरीक्षण के बाद भी जिला अस्पताल के हालात सुधरते नहीं दिख रहे। हाल ये है कि रात में मरीज को डॉक्टर की जरूरत पड़ जाए तो वह ढूंढे नहीं मिलते हैं। डेंगू वार्ड में तो सुबह तक डॉक्टर तक नहीं पहुंचते। मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि बुधवार दोपहर 12:15 बजे चिकित्सक अस्पताल पहुंचे। स्टाफ चादरें भी नहीं बदल रहा है। जिम्मेदार एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
विज्ञापन

डेंगू वार्ड में सरैया की राजकुमारी, भरथना की गीता, अधियापुर की मुन्नी देवी, विजय नगर की गुड्डी देवी, रामनगर की रीमा देवी भर्ती हैं। इन सभी की प्लेटलेट्स 40 से 53 हजार हैं। कुछ मरीजों ने रोजाना रिपोर्ट न मिलने की बात कही। बताया कि डॉक्टर देर से आते हैं। कुछ देर रुकने के बाद चले जाते हैं। रात में तो तलाशने पर भी नहीं मिलते। डेंगू वार्ड में भर्ती मरीजों की परेशानी की एक वजह यह भी है कि ये तय नहीं है कि नोडल अधिकारी कौन है।
जिला अस्पताल पुरुष के अधीक्षक डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि डेंगू वार्ड की जिम्मेदारी डिप्टी सीएमओ डॉ. श्रीनिवास यादव की है। वही इसके नोडल अधिकारी हैं। उन्हीं से सारी जानकारी मिलेगी। सीएमओ डॉ. गीताराम ने भी डॉ. श्रीनिवास यादव के नोडल अधिकारी होने की पुष्टि की।
विज्ञापन

वहीं डॉ. श्रीनिवास यादव का कहना है कि वह संचारी के नोडल अधिकारी हैं। अब इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर किस तरह जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं।
केस एक
बेटे की तबीयत बिगड़ी, दोपहर तक करना पड़ा इंतजार
सरैया रोड निवासी राजकपूर ने बताया कि मंगलवार रात को डॉक्टर वार्ड में नहीं आए। उनका पुत्र अंकित भर्ती है। उसकी प्लेटलेट्स 58 हजार बची हैं। रात में तबीयत ठीक न होने पर डॉक्टर को तलाशा लेकिन वह नहीं मिले। स्टाफ ने कुछ नहीं बताया। किसी तरह रात काटी। सोचा सुबह डॉक्टर के आने पर समस्या बताएंगे लेकिन वह दोपहर 12:15 बजे आए।
केस दो
छह दिन बाद भी बेटे को आराम नहीं
बकेवर क्षेत्र के कछपुरा निवासी मरीज मदन सिंह ने बताया कि रात में खोजने पर भी डॉक्टर नहीं मिलते हैं। बुधवार सुबह स्टाफ चादर देकर चला गया। उन्हें खुद चादर बदलनी पड़ी। पुत्र को रविवार दोपहर इमरजेंसी से डेंगू वार्ड में भर्ती कराया। छह दिन से अस्पताल में इलाज चल रहा है लेकिन बेटे को आराम नहीं है और कमजोरी बनी हुई है। डॉक्टर आते तो परेशानी बताते।
रात में डॉक्टरों की ड्यूटी लग रही है। वह पता करेंगे कि मंगलवार रात जिन डॉक्टरों की ड्यूटी थी, वह अस्पताल में थे कि नहीं। स्टाफ अगर चादर नहीं बिछा रहा है तो इसके बारे में भी उन्हें सख्त हिदायत दी जाएगी। - एमएम आर्या, अधीक्षक, जिला पुरुष अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें