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Etawah News: करोड़ों की लागत से बनी आईटीआई की फांक रही धूल

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ताखा। आईटीआई का भवन दो साल से तैयार खड़ा होने के बाद भी यहां स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। यहां दाखिला लेने वाले छात्रों को 45 किलोमीटर दूर इटावा आईटीआई पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। जिम्मेदार जल्द शिक्षकों की नियुक्ति होने की बात कह रहे हैं।
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सपा शासन के दौरान ताखा के युवाओं को आईटीआई के रूप में बड़ी सौगात मिली। लेकिन बजट के अभाव में निर्माण पूर्ण होने में देर हो गई। 2020 में निर्माण निगम ने भवन तैयार कर विभाग के सुपुर्द कर दिया। दो साल पहले कालेज को विभाग की ओर कोड भी जारी कर दिया गया। कॉलेज के नाम से सीटें भी दी जा रही हैं लेकिन स्टाफ की तैनाती नहीं की गई। ताखा कॉलेज के नाम से छात्रों का दाखिला कराने पर उन्हें आईटीआई इटावा में जाना पड़ता है। इसके कारण उन्हें परेशानी होती है।
12 ट्रेडों में हैं 400 सीटें
कॉलेज में 12 ट्रेड हैं। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, टर्नर, इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक, मोटर वाहन मैकेनिक, वेल्डर, प्लंबर, कॉस्मेटोलॉजी, फैशन डिजाइन, फिटर ट्रेड में छात्रों के लिए 400 सीटें हैं।
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युवाओं की प्रतिक्रिया
भरतिया निवासी सचिन यादव ने कहा कि कॉलेज बनने से खुशी हुई थी, लेकिन इसके शुरू न होने से उतनी ही निराशा हुई। कॉलेज होने के बाद भी आईटीआई नहीं कर सके।
ने बताया कि आईटीआई कॉलेज में शिक्षण शुरू होने से 30 किलोमीटर के दायरे रहने वाले छात्रों को इसका फायदा मिलता।
पुरैला निवासी अर्पित कुमार ने बताया कि उन्होंने ताखा स्थित कॉलेज में रजिस्ट्रेशन करवाया लेकिन पढ़ने के लिए इटावा जाना पड़ रहा है। सर्दियों में बहुत परेशानी होती है।
राजापुर निवासी ऋषि कुमार ने बताया कि कॉलेज होने बाद भी क्षेत्र के सैकड़ों युवा आईटीआई करने बाहर जा रहे है। यह तो चिराग तले अंधेरा वाली बात है।
वर्जन
आईटीआई इटावा के प्रधानाचार्य डॉ. राजकुमार सिंह यादव ने बताया कि शासन ने कॉलेज को सीसीसी मॉडल पर प्रस्तावित कर दिया है। जल्द ही कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
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