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छुआछूत को दरकिनार कर साथ बैठककर खाया खाना

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इटावा। मुलायम सिंह ने छुआछूत व जातिगत व्यवस्था की खुलकर आलोचना की थी। सैफई के प्रधान व मुलायम सिंह के बचपन के सखा रामफल वाल्मीकि ने 45 साल पुराना किस्सा सुनाया। बताया कि छुआछूत को दरकिनार कर वह साथ बैठकर खाना खाते थे।
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रामफल ने बताया कि वर्ष 1967 के चुनाव में उनकी उम्र 22 वर्ष थी। उन्होंने भी इस चुनाव में सखा मुलायम को जिताने के लिए काफी मेहनत की थी। मुलायम जब भी गांव आते थे, तो हमारे समाज के लोगों से गले मिलते थे और अखाड़े में पहलवानी भी सिखाते थे।
1977 में नेताजी सूबे की सरकार में सहकारिता मंत्री थे।
इसी समय नेताजी ने छोटे भाई राजपाल सिंह यादव का शादी समारोह गांव सैफई में आयोजित किया। इस समारोह में उन्होंने इलाके के सभी वाल्मीकि व अन्य दलित समाज को निमंत्रित किया था। बुजुर्ग प्रभुदयाल समाज के लोगों के साथ भोजन करने पंडाल पहुंचे तो नेताजी ने उन्हें गले लगाते हुए साथ भोजन करने का आग्रह किया। वह बोले कि हम अलग बैठकर भोजन करेंगे, लेकिन मुलायम नहीं माने और पंडाल में सबके साथ बैठाकर भोजन कराया।
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मुलायम के आग्रह पर सैफई आए थे महानायक
मुलायम के राजनीतिक सफर में बॉलीवुड का भी अहम रोल है। रामफल वाल्मीकि ने बताया कि वर्ष 1996 की बात है जब नेताजी एक हवाई यात्रा पर थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात अमर सिंह से हुई थी। तब वह देश के रक्षामंत्री थे। अमर-मुलायम की ये मुलाकात दोस्ती में तब्दील होने का पता लोगों को तब लगा, जब वर्ष 2000 में मुलायम सिंह यादव ने अमर सिंह को सपा का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया।
पहली बार 2002 में सैफई महोत्सव का आयोजन हुआ, तब मुलायम सिंह के आग्रह पर अमर सिंह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन समेत कई बॉलीवुड हस्तियों को लेकर पहली बार यहां पहुंचे थे। वर्ष 2003 में मुलायम सिंह फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो अमर सिंह को प्रदेश की औद्योगिक विकास परिषद का चेयरमैन बना दिया। जिससे कारपोरेट जगत की हस्तियां उनसे जुड़ती चली गईं।
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