मुनि श्री 108 प्रमुख सागर जी महाराज का गुरुवार को इटावा में आगमन हुआ। इस दौरान जयकारों और जैन भजनों की ध्वनि से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा। जगह-जगह स्वागत, पाद प्रच्छालन एवं आरती का सिलसिला चलता रहा।
बाद में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि धन का अहंकार रखने वाले हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पैसा कुछ भी हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है, लेकिन सब कुछ नहीं हो सकता।
हर आदमी को धन की अहमियत समझना बहुत जरूरी है। नारायन कालेज से पद बिहार करते हुए जैसे ही मुनि श्री 108 प्रमुख सागर जी महाराज नुमाइश चौराहा पर पहुंचे तो पहले से एकत्र जैन धर्मालम्बियों ने पाद प्रच्छालन एवं आरती कर भव्य स्वागत किया।
यहां से जैन मुनि पक्का तालाब चौराहा, नौरंगाबाद चौराहा, पक्की सराय, नगर पालिका चौराहा, राजागंज चौराहा, बल्देव चौराहा, महावीर मार्ग होते हुऐ श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर लालपुरा पहुंचे। इस दौरान जगह जगह स्वागत किया गया। लालपुरा पहुंचते ही यह जुलूस धर्मसभा में तब्दील हो गया।
उन्होंने कहा कि तुम्हारी वजह से जीते जी किसी की आंखों में आंसू आए तो यह सबसे बड़ा पाप है। लोग मरने के बाद तुम्हारे लिए रोए, यह सबसे बड़ा पुण्य है। इसीलिए जिंदगी में ऐसे काम करो कि, मरने के बाद तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए किसी और को प्रार्थना नहीं करनी पड़े।
जुलूस के दौरान संजू जैन ठेकेदार, महेश जैन रपरिया, चन्द्रप्रकाश जैन, आनन्द बाबा, गुडडू जैन, टन्नू जैन, आकाशदीप जैन, सुदर्शन जैन, बोनू जैन, दीपे जैन, महावीर जैन, राकेश जैन, सुशील जैन, संगीत जैन आदि मौजूद रहे।