भरथना। बाजपेयी नगर निवासी निशानाथ दीक्षित ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर पैतृक गांव मोढ़ी में जैविक खेती शुरू कर दी। फल, फूल व सब्जियों में केमिकल का प्रयोग न करने का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वह अन्य किसानों के लिए मिसाल बने हुए हैं। अब तक करीब 100 किसान उनसे प्रशिक्षण का लाभ उठा चुके हैं और जैविक खेती कर रहे हैं।
निशा नाथ ने बताया कि परंपरागत खेती में आय के स्रोत सीमित है। मल्टी लेयर फार्मिंग से किसान की आमदनी बढ़ेगी। फार्मिंग से लगाव की बदौलत टूरिज्म का शौक पूरा कर पा रहे हैं। कंबोडिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सिंगापुर, वियतनाम, भूटान, नेपाल खेती-किसानी की जानकारी जुटाते रहते हैं। सपना है कि एक दिन मोढ़ी गांव मल्टी लेयर फार्मिंग का हब बने। निशानाथ के मुताबिक उनकी मल्टी लेयर फार्मिंग करने की सोच को अशोक नगर निवासी ससुर चंद्र प्रकाश मिश्रा, चचेरे भाई आईएएस प्रशांतराज व विनीत दीक्षित ने बढ़ावा दिया। साथ ही परिजनों ने सहयोग प्रदान किया। इसी कारण 15 साल पुरानी नौकरी 2017 में छोड़ दी।
कोरोना काल में आर्गेनिक फार्मिंग वीडियो यूट्यूब पर देखे। इसके बाद लखनऊ के उद्यमिता संस्थान से तीन महीने का फार्मिंग कोर्स किया। वर्ष 2021 में पैतृक गांव मोढ़ी में तीन एकड़ जमीन में फल-फूल सब्जी की मल्टी लेयर फार्मिग की सोच के साथ प्राकृतिक खेती करने में जुट गए। गोबर की खाद, जैविक खाद व कंपोस्ट आदि मिश्रण का प्रयोग कर मिट्टी तैयार की। फल-फूल व सब्जियों को विषैले कीट व रोग से बचाने के लिए नीम का तेल, खली के अलावा बायो प्रोडक्ट का ही उपयोग करते हैं।
मीठी तुलसी, केला, पपीता और अन्य फल सब्जियां उगाईं
बताया कि तीन एकड़ खेत में करीब डेढ़ एकड़ में मीठी तुलसी (स्टीविया) की पौध लगाई हेे। साथ ही पपीता व केला समेत फूलदार कलकतिया गेंदा के पौधे, लहसुन, मेथी, प्याज, पालक, धनिया, लौकी, तुरैया, गोभी, करेला व गाजर आदि सब्जियां उगाते हैं। बताया कि मल्टी लेयर फार्मिंग का मॉडल देखने इटावा, जसवंतनगर, बसरेहर आदि के अलावा अन्य जगहों के किसान आते हैं। बताया कि जल संचयन के लिए एक बीघा का तालाब भी बनाया है। मछली उत्पादन के लिए सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाने के बावजूद एक बीघा के तालाब में सिंघी मछली का उत्पादन कर रहे हैं।