इटावा। बिगड़े खानपान के कारण युवाओं को बीमारियां घेर रही हैं। हाई बीपी, शुगर बढ़ने से किडनी फेल होने की समस्या ज्यादा बढ़ गई है। 17 से 35 साल उम्र के युवा किडनी फेल होने की समस्या से जूझ रहे हैं। जिला अस्पताल में इन दिनों रोजाना 36 मरीजों की डायलिसिस हो रही है, इनमें 10 मरीज युवा हैं।
किडनी विशेषज्ञ डॉ. शाहिद खान ने बताया कि किडनी खराब होने से एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन बनना कम हो जाता है। इससे हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता, जिसकी वजह से किडनी फेल होने की संभावना बढ़ती है। एल्डोस्टेरोन हार्मोन को किडनी नियंत्रित करती है, अगर किडनी खराब होनी शुरू हो जाएगी तो एल्डोस्टेरोन हार्मोन अनियंत्रित हो जाता है। इसकी वजह से व्यक्ति का ब्लडप्रेशर बढ़ने लगता है, जिससे किडनी फेल हो जाती है।
किडनी विशेषज्ञ ने बताया कि खराब खानपान और सामान्य सी बीमारी होने पर अच्छे डॉक्टर से परामर्श न लेने के कारण किडनी की बीमारी पांव पसार रही है। पूरा पोषण न मिलने से किडनी में समस्या हो जाती है। ऐसे में हर वर्ग के लोगों को खासतौर पर युवाओं को खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पोषण युक्त खानपान हो करना चाहिए।
जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में रोजाना 36 मरीजों की डायलिसिस हो रही है। इनमें रोजाना करीब 10 मरीज 35 साल तक के हैं। डायलिसिस यूनिट में 12 मशीनें हैं। इसमें एक पॉजिटिव और 11 निगेटिव मशीन शामिल हैं। डायलिसिस करके मरीज के अंदर से अशुद्ध पदार्थों को बाहर निकाला जाता है और ब्लड को मशीन से साफ कर वापस शरीर में भेजा जाता है।
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फोटो 06:: पंकज कुमार
यूनिट मैनेजर पंकज कुमार ने बताया कि 30 सितंबर 2019 से जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट चल रही है। कोविड काल में मरीजों की संख्या कम रही लेकिन इसके बाद मरीज बढ़ते गए। 31 जनवरी 2024 तक जिला अस्पताल में 29,668 मरीजों की डायलिसिस हो चुकी है। इनमें 30 प्रतिशत युवा शामिल हैं।
किडनी खराब होने के लक्षण
- जल्दी थकावट महसूस करना
- पेशाब झागदार होना या खून आना
- हाथ पैर पर सूजन आना
- आंखों के नीचे सूजन आना
- भूख और प्यास में कमी आना
- उल्टी आना
किडनी को ऐसे बचाएं
- रक्तचाप पर नियंत्रण रखें
- नियमित व्यायाम करें
- दर्द निवारक गोलियों का ज्यादा सेवन न करें
- शुगर को नियंत्रित रखें
- चिकित्सक से परामर्श लेकर दवाएं लें
सैफई के गांव नगला बिहारी कुईया निवासी उम्मेद सिंह ने बताया कि उनका 17 वर्षीय पुत्र निशांत यादव इंटर में पढ़ता है। डेढ़ साल से कमजोरी आने पर पीजीआई लखनऊ में जांच कराने पर दोनों किडनी फेल निकलीं। डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट की बात कही। परिवार में सभी लोग किडनी देना चाहते थे, लेकिन किसी न किसी को कोई समस्या होने पर किडनी ट्रांसप्लांट न होने पर डायलिसिस कराने की सलाह दी गई। करीब साल भर से सप्ताह में दो बार डायलिसिस करा रहे हैं।
शहर के विजय नगर निवासी जतिन कुमार (35) करीब साढ़े तीन साल से डायलिसिस करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाथ-पैर में सूजन के साथ ही कुछ और समस्याएं होने पर करीब साढ़े तीन साल पहले दिल्ली के एक अस्पताल में जांच कराई। रिपोर्ट सामने आई तो किडनी में संक्रमण का पता चला। डॉक्टर ने सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस कराने की सलाह दी। तब से जिला अस्पताल में डायलिसिस चल रही है। बताया कि बंगलुरू में केमिकल फैक्ट्री में काम करते थे, वह भी छूट गया।