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Etawah News: अस्पतालों को नहीं हुआ भुगतान, मरीज कैसे हो आयुष्मान

Mon, 22 May 2023 11:36 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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(फोटो संख्या 14)
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- 163 में से सिर्फ छह निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना की सेवा
- तीन से चार माह का भुगतान न होन से नए मरीजों को लेने में कतरा रहे डॉक्टर

संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। आयुष्मान कार्ड बनवाने की रफ्तार भले ही तेज करने की कवायद की जा रही हो, लेकिन योजना से संबद्ध प्राइवेट अस्पतालों का लाखों का भुगतान न होने से अस्पताल अब नए मरीजों के इलाज करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं, नए अस्पताल अब इस योजना के साथ जुड़ना भी नहीं चाहते हैं।
25 सिंतबर 2018 से शुरू हुई आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में गरीब लोगों को एक साल में पांच लाख रुपये का इलाज कराने सुविधा मिल रही है। इसके लिए लाभार्थी के पास अंत्योदय राशन कार्ड होना अनिवार्य है। तभी गोल्डन कार्ड बन पाता है। कार्ड मिलने के बाद ही लाभार्थी इलाज कराने की सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकता है।
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जनपद में आयुष्मान लाभार्थियों की संख्या 3,98,338 है। 18 मई तक 17132 मरीजों का इलाज हो चुका है। 21 मई तक 3,05,749 कार्ड बन चुके हैं, जो 76.75 प्रतिशत है। जनपद में आयुष्मान परिवारों की संख्या 1,75,478 है। इनमें से कवर किए गए परिवारों की संख्या 93,243 हैं, जो 53.14 है।
लगातार आयुष्मान कार्ड तेजी से बनवाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन निजी अस्पताल इस योजना से जुड़ने में रुचि नहीं ले रहे हैं। जिले में पंजीकृत 163 अस्पतालों में से सिर्फ छह निजी अस्पताल ही इस सेवा जुड़े हुए हैं। वहीं 12 सरकारी अस्पतालों में इस योजना के तहत इलाज दिया जा रहा है। कई महीनों से पुराने इलाज किए मरीजों को भुगतान डॉक्टरों को न होने से अब निजी अस्पताल नए केसों को लेने से कतरा रहा हैं। उनका मानना है कि योजना से जुड़ने से उन्हें नुकसान हो रहा है।


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10 अस्पतालों में बनते हैं आयुष्मान कार्ड
नोडल अधिकारी आयुष्मान के नोडल अधिकारी डॉ.यतेंद्र राजपूत ने बताया कि जनपद में जिला पुरुष व महिला अस्पताल समेत सभी आठों सीएचसी पर आयुष्मान कार्ड बनाए जाते हैं। इसके लिए दस आयुष मित्र कार्य कर रहे हैं। रविवार को भी गोल्डन कार्ड बनाए जाते हैं। इस कार्य में आशाओं की मदद ली जाती हैं। सीएचसी पर संबंधित एसडीएम, एडीओ व सीएचसी प्रभारी के समन्वय में कार्ड बनाए जा रहे हैं।

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सर्जरी व डायलिसिस का जनवरी से अब तक नहीं हुआ भुगतान
आयुष्मान योजना में शामिल जीएलपी हॉस्पीटल के संचालक डॉ.आरएस पाल ने बताया कि उनका चयन जनरल सर्जरी व डायलिसिस के लिए हुआ था। जनवरी से लेकर अब तक किए इलाज का करीब पांच लाख रुपये का भुगतान नहीं हो रहा है। करीब एक महीने पूर्व सीएमओ को पत्र के साथ इलाज करने वाले मरीजों की सूची भी भेज चुके हैं, लेकिन उनकी ओर से भी कोई जवाब नहीं मिला है।
डॉ.आरएस पाल ने बताया कि इनमें करीब 400 डायलिसिस व 15 से 20 जनरल सर्जरी केस का भुगतान नहीं हुआ है। इस वजह से उन्होंने केस लेने कम कर दिए हैं। ऐसी स्थिति में बहुत से मरीज दूसरे स्थानों पर रुपये खर्च करके इलाज करा रहे हैं। कहा कि वह तो इलाज ही करते हैं और कर रहे हैं, लेकिन जब भुगतान नहीं होगा,तब दिक्कतें तो होती हैं।

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दो मामलों का नहीं हुआ भुगतान, योजना से अस्पताल भी हटा दिया
आयुष्मान योजना में शामिल रहे सुशीला अस्पताल के संचालक डॉ. डीके सिंह ने कि उनके यहां बच्चों का इलाज होता है। उनका अस्पताल भी इस योजना से जुड़ा था। प्रदेश का तीसरा केस उनके अस्पताल में आया था। कुल मिलाकर चार केस आए, लेकिन भुगतान दो केस का ही हुआ। बच्चों के केस आने कम होने पर उन्होंने एनआईसीयू के लिए शासन स्तर पर अनुमति मांगी, लेकिन नहीं मिली। इसके लिए काफी प्रयास भी किया, लेकिन उनके अस्पताल को योजना से हटा दिया गया।

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625 केसों का 95 लाख का भुगतान अटका
जेके हॉस्पीटल के संचालक डॉ. मनोज यादव का कहना है कि योजना आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बेहतर थी। सहयोग के लिए हमारा अस्पताल भी जुड़ा था, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं हुआ है। करीब 625 मरीजों का 95 लाख रुपये का बकाया है। इसमें कई गंभीर बीमारियों का ऑपरेशन से इलाज किया गया है। कई बार भुगतान के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई उत्तर नहीं मिला है।

वर्जन
आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले अस्पतालों के भुगतान में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए जो कमी होती है उसे दूर कराते हैं। मेरी जानकारी में ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है। फिर भी पता कराते हैं। - डॉ. गीताराम, सीएमओ
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वर्जन
एडीएम जयप्रकाश ने बताया कि सीएमओ के नेतृत्व में इन व्यवस्थाओं के संचालन और उसके भुगतान को लेकर समिति बनी हुई है। भुगतान क्यों देरी से हो पा रहा इस संबंध में चर्चा करने के बाद हमारी ओर से भी शासन को पत्र लिखा जाएगा।
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