इटावा। इस्लामिया इंटर कॉलेज में इटावा हिंदी सेवा निधि की ओर से सारस्वत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें हिंदी को सशक्त बनाने के लिए 21 विभूतियों को सम्मानित किया गया।
न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त ने 30 साल पहले सारस्वत समारोह की शुरुआत की थी। उन्हीं की स्मृति में इसका आयोजन किया जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश कृष्ण मुरारी ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी को सशक्त बनाने की शुरुआत घर से होती है। जितनी भाषाओं का ज्ञान हो, वह उतना ही अच्छा है। अब न्यायपालिकाओं में भी निर्णय और आदेशों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। जल्द ही इसके अच्छे परिणाम देखने को मिलेंगे।
शनिवार दोपहर ढाई बजे संचालक डॉ. कुश चतुर्वेदी और एडवोकेट रामकुमार ने सभी का परिचय कराया। इसके बाद विभिन्न विधाओं के महारथियों ने हिंदी को सशक्त करने के लिए करीब ढाई घंटे मंथन किया। प्रख्यात समालोचक डॉ. रमाकांत शर्मा ने जिस भाषा को बोलकर आया यहां स्वराज, अपने ही घर में हुई निर्वासित आग। यह स्वाधीनता यह कैसा परिवेश, पर भाषा में जी रहा निज भाषा का देश...जय हिंदी, जहां नागरी बोले सारा देश सुनाकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
पूर्व राज्यसभा सदस्य उदय प्रताप ने कविता के जरिये पश्चिमी सभ्यता और भाषा पर तंज कसा। शिक्षाविद् डॉ. पीयूष रंजन अग्रवाल ने नई शिक्षा नीति से क्षेत्रीय भाषाओं का प्रबुद्ध बढ़ने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारी दो मां हैैं गंगा और हिंदी। यह हम सभी को ध्यान देना चाहिए। डॉ. विनोद जैन कहा कि चिकित्सा सेवा की जानकारी जन-जन तक आसानी से हिंदी में पहुंचाई जा सके। चिंतक और विचारक सुधींद्र भदौरिया ने हिंदी के लिए महात्मा गांधी से लेकर राम मनोहर लोहिया के प्रयासों को बताया।
पूर्व सांसद राजनीति प्रसाद ने चले देश में देशी भाषा, अंग्रेजी करे घिटपिट-घिटपिट पंक्तियां सुनाईं। शायरा शबीना अदीब ने उर्दू है नाम मेरा, हिंदी के गांव में हूं, रचना सुनाई मोती लाल गुप्त ने कहा कि जनभाषा में सरकारें रोजगार और शिक्षा क्यों उपलब्ध नहीं करा रहीं।
इन्हें किया गया सम्मानित
जन्मशती दशक सम्मान : पूर्व राज्यसभा सदस्य और कवि उदय प्रताप सिंह को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह मैनुपरी के हैं। इन्होंने अखबारों में रोमन लिपि में विज्ञापन छापने का विरोध किया था। इसके बाद से ही अखबारों में देवनागरी लिपि से विज्ञापन छापने का आदेश दिया गया था।
न्यायमूर्ति प्रेशंकर गुप्त राष्ट्रीय जनवाणी सम्मान : यह पुरस्कार हिंदी के प्रख्यात कवि लीलाधर जगूड़ी को दिया गया। वह टिहरी के गढ़वाल के धाकड़ गांव के रहने वाले हैं। नए प्रतीक और नूतन दृष्टि की त्रिवेणी इनकी विशिष्ट रचानाएं हैं। नाटक पांच बेटे भी काफी प्रसिद्ध है। यह पद्मश्री सम्मान से भी नवाजे जा चुके हैं।
गंग देव सम्मान : यह सम्मान समालोचक डॉ. रमाकांत शर्मा को मिला। वह मैनपुरी के मूल निवासी हैं। गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर की कर्मस्थली कोलकाता के शांति निकेतन से शोध कार्य पूर्ण करने वाले रमाकांत शर्मा प्राचार्य से सेवानिवृत्त हैं।
न्यायमूर्ति रामभूषण मेहरोत्रा स्मृति हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान उच्च न्यायालय इलाहाबाद के न्यायाधीश डॉ. गौतम चौधरी को दिया गया है। वह अब तक लगभग दो हजार निर्णय और आदेश हिंदी में देकर हिंदी को सशक्त करने का काम किया है।
श्रीमती कुमुद भूषण कला, संगीत हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान फिल्म निर्देशक और संपादक विनोद गनात्रा को दिया गया है। उन्होंने दुनिया में पहली बच्चों पर अधारित फीचर फिल्म को सबसे ज्यादा ऊंचाई से शूट कराकर कीर्तिमान हासिल किया है।
जननेता श्री मुलायम सिंह यादव स्मृति हिंदी सेवा सम्मान : इस सम्मान को पहली बार शामिल किया गया है। इसे इटावा के स्वतंत्रता आंदोलन के कमांडर और सांसद अर्जुन सिंह भदौरिया के बेटे समाजवादी चिंतक, प्रख्यात विचारक सुुधीन्द्र भदौरिया को नवाजा गया है।
भारत रत्न लता मंगेशकर स्मृति हिंदी सेवा सम्मान: यह इशिता विश्वकर्मा को दिया गया है। आईजीटी विजेता और प्रख्यात गायिका जबलपुर की मूल निवासी हैं। वह फिलहाल में मुंबई में रह रही हैं। इंडिया आइडियल की भी विजेता रह चुकी हैं।
श्रीमती सावित्री देवी गुप्त हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान बाल साहित्यकार डॉ. वर्षा अग्रवाल को दिया गया है। वह 44 वें बाल साहित्यकार सम्मान से भी सम्मानित हो चुकी हैं।
सेठ गोविंद दास शासन-प्रशासन हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान शिक्षाविद पीयूष रंजन अग्रवाल को दिया गया। वह एपी सिंह विवि रीवा और पूर्वांचल विवि जौनपुर के कुलपति रह चुके हैं। इनके कई शोध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. दुखन राम चिकित्सा विज्ञान हिंदी सेवा सम्मान: यह सम्मान प्रख्यात चिकित्साविद् डॉ. विनोद जैन को मिला है। वह लगातार चिकित्सा से जुड़ी किताबों को हिंदी में लिखकर प्रकाशित करा रहे हैं। इन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का विज्ञान भूषण सम्मान भी प्रदान किया गया है।
श्याम नाथ कक्कड़ हिंदी विधि सेवा सम्मान : यह सम्मान देश रत्न सिन्हा को दिया गया। वह लखनऊ के निवासी हैं। पत्रकारिता और लेखन में लंबा अनुभव है। वह उत्तर प्रदेश हिंद विधि प्रतिष्ठा के अध्यक्ष पद पर हैं।
बेकल उत्साही-गोपालदास नीरज सम्मान : यह सम्मान प्रख्यात शायरा शबीना अदीब को दिया गया है। वह हिंदी और उर्दू बड़ी कवयित्री हैं। वह कानपुर की मूल निवासी हैं।
अंतरराष्ट्रीय सामजिक कार्यकर्ता डॉ. रंजना कुमारी अमृत महोत्सव हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान काशी विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य पंडित विशंभर नाथ शर्मा की पौत्री और कमांडर अर्जुन सिंह की पुत्रवधू को दिया गया है। वह नारी अधिकार, गरीबी और शैक्षिक समानता के लिए संघर्षरत हैं।
अमृत महोत्सव हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान पूर्व सांसद राजनीति प्रसाद सिंह को मिला है। वह बिहार के नालंदा के मूल निवासी हैं। वह राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रबल पक्षधर हैं। राष्ट्रीय जनता दल के बिहार अधिवक्ता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी रहे हैं।
अमृत महोत्सव हिंदी सेवा सम्मान : यह सम्मान मोतला लाल गुप्त आदित्य को दिया गया है। वह भाषा सेवी संस्था वैश्विक हिंदी सम्मेलन के संस्थापक निदेशक भी हैं।
यह भी सम्मानित
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श्रीमन्नारायण रत्नाकर शास्त्री अलंकरण : डॉ. गुरु प्रताप वर्मा गुरु औरैया
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