इटावा। ठंड में इन दिनों हृदयघात और मधुमेह के मरीज बढ़ गए हैं। अकेले दिसंबर माह में मधुमेह, एंजाइना और ब्लड प्रेशर के करीब 1500 मरीज दिखाने आए हैं। एक महीने में ही कुल 15 प्रतिशत मरीजों की बढ़ोतरी हुई है।
तापमान गिरने के साथ ही गलन लगातार बढ़ रही है। इस बीच लगातार हृदयघात, एंजाइमा और मधुमेह के मरीज बढ़ गए हैं। सैफई मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग की ओपीडी में शुक्रवार को 54 मरीज दिखाने के लिए आए। इसमें सबसे ज्यादा मरीज एंजाइमा और मधुमेह के रहे। वहीं, नवंबर माह में करीब 1339 सौ मरीज आए थे। वहीं, दिसंबर माह में 1575 मरीज आ चुके हैं। इनमें से से लगभग 15 प्रतिशत हार्ट अटैक, 40 प्रतिशत शुगर और बीपी 20 प्रतिशत एंजाइना के रहे। कार्डियोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभाग अध्यक्ष सुभाष चंद्र ने बताया की दिसंबर माह में 1575 मरीज पहुंचे। इनमें सर्दी के मौसम में 15 प्रतिशत मरीज का इजाफा हुआ।
इन बातों का रखें ध्यान:::::
ज्यादा पानी न पिएं :
दिल का एक काम शरीर में मौजूद रक्त के साथ लिक्विड को पंप करने का भी होता है। जिन्हें दिल की बीमारी होती है। उनके दिल को वैसे भी पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में अगर आप बहुत ज्यादा पानी पी लेंगे तो हार्ट को पंपिंग में और भी मेहनत करनी पड़ेगी और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाएगा। पानी कितना पिएं, इसके लिए अपने डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। कई लोग सुबह उठकर दो-तीन गिलास पानी पीते हैं। हार्ट के मरीज हैं तो किसी भी मौसम में ऐसा न करें, ठंड के मौसम में तो बिल्कुल भी नहीं।
नमक कम से कम खाएं :
दिल के मरीजों को अपने खाने में नमक की मात्रा कम से कम लेनी चाहिए। केवल इस वजह से ही नहीं कि यह ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ा देगा, बल्कि इसे ध्यान में रखें कि नमक शरीर में पानी को रोकता है। पानी को रोकने का मतलब यही होगा कि शरीर में दिल को ज्यादा मात्रा में पेय पदार्थ को पंप करना होगा। यानी ज्यादा मेहनत करनी होगी। नतीजा हार्ट अटैक के रूप में आ सकता है।
सुबह जल्दी उठें और न जल्दी सैर पर जाएं :
जिन लोगों को पहले भी हार्ट अटैक आ चुका है या जिनके दिल पर ज्यादा खतरा है, वे ठंड के दिनों में न तो बिस्तर जल्दी छोड़ें और न ही जल्दी सैर पर जाएं। ठंड की वजह से नसें पहले से ही सिकुड़ी हुई होंगी और जब ठंडे वातावरण के संपर्क में आएंगे तो बाहर की अधिक सर्दी की वजह से शरीर को अपने आप को गर्म बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। इससे दिल को ज्यादा काम करना पड़ेगा।
यह भी जानें: ठंड में खतरा क्यों बढ़ता है, पहले इसे समझिए
सोते समय शरीर की एक्टिविटीज स्लो हो जाती हैं। बीपी और शुगर का लेवल भी कम होता है। लेकिन उठने से पहले ही शरीर का ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम उसे सामान्य स्तर पर लाने का काम करता है। यह सिस्टम हर मौसम में काम करता है। लेकिन ठंड के दिनों में इसके लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे जिन्हें हार्ट की बीमारी है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।