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पचनद की रेत से होगा असाध्य रोगों का इलाज

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पचनदा पर रेत में स्नान करते लोग। संवाद - फोटो : ETAWAH
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इटावा। आयुष मंत्रालय पचनद क्षेत्र को आयुर्वेदिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने जा रहा है। जिले में पांच नदियों के संगम स्थल पचनद पर रेत स्नान व पंचकर्म जैसी आयुर्वेदिक क्रियाएं कराई जाएंगी। इसके लिए मंत्रालय ने डॉ. कमल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मनोज दीक्षित ने बताया प्राचीन काल से ही रेत स्नान शरीर के लिए मुफीद माना गया है। इसलिए यहां रेत स्थान की व्यवस्था कराई जा रही है। यहां आयुर्वेदकी अन्य पद्धतियों से कई रोगों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए पचनद के आसपास के रेतीले स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। एक से डेढ़ महीने में सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।
यह है रेत स्नान
आयुर्वेदिक पर्यटन के नोडल अधिकारी डॉ. कमल ने बताया चिह्नित स्थानों पर शरीर को एक से दो घंटे के लिए रेत के ढेर में दबाकर रखा जाता है। इससे शरीर से विकार बाहर निकल आते हैं। रेत शरीर में मौजूद खनिजों का स्तर सही करती है। रेत स्नान दो तरीके से किया जाता है।
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गर्म रेत स्नान के फायदे
गर्म रेत शरीर के सीधे संपर्क में आती है। स्वेद ग्रंथियां खुल जाती हैं। पसीने के रूप में शरीर से सोडियम बाहर निकालती हैं। मांसपेशियों में मौजूद कैल्शियम की मात्रा अधिक हो जाती है। इससे मांसपेशियां को आराम मिलता है। दर्द दूर होता है। गर्म रेत स्नान की प्रक्रिया बार-बार की जाए तो त्वचा रोग, कब्ज, रक्त विकार, सर्वांग देहशूल, गठिया, जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।
ठंडी रेत स्नान के फायदे
डॉ. कमल ने बताया कि ठंडी रेत का स्नान व्यक्ति को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है। अवसाद के मरीजों के लिए ठंडी रेत का स्नान बहुत लाभकारी है। इससे एनोरोक्सिया, इनसोम्निया, एंजायटी जैसे मानसिक रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है।
लोग ले सकते हैं जानकारी
डॉ. कमल ने बताया पिछले महीने आयुष विभाग के माध्यम से 70 लोगों का रेत स्नान का ट्रायल हुआ था। इस चिकित्सा पद्धति के बारे में यदि कोई जानकारी लेना चाहे तो मोबाइल नंबर 9259326309 पर संपर्क कर सकता है।
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