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Etawah News: आठ बीघा बेच चुके थे, बची पांच बीघा का आज बैनामा करते

Wed, 10 Jan 2024 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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इकदिल/जसवंतनगर। आशाराम और उसके बेटों के बीच जिस जमीन का विवाद जमीन का विवाद चल रहा था, वह कुल 13 बीघा थी। इसमें से कुल आठ बीघा खेती आशाराम दो बार में तीन लोगों को बेच चुके थे। बची पांच बीघा खेती को कई दिनों से बचने के लिए प्रयासरत था। इसका दोनों बेटे और पहली पत्नी विरोध कर रहे थे, लेकिन आशाराम मानने को तैयार नहीं था। वह एक माह में दो बार बची जमीन का सौदा करने के लिए आ चुके थे।
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आशाराम के पिता देवीदयाल तीन भाई थे। उनमें से दो भाइयों ने शादी नहीं की थी। सिर्फ पिता देवीदयाल ने ही शादी की थी। सूत्रों के अनुसार, भाइयों की मिलाकर लगभग 39 बीघा जमीन थी। इसमें से एक अविवाहित भाई और आशाराम के पिता ने अपनी खेती पहले ही बेच दी थी। चाचा दंबर राजपूत ने अपनी जमीन भतीजे आशाराम के नाम कर दी थी। ऐसे में आशाराम 13 बीघा जमीन के मालिक हो गए थे। बताते हैं कि करीब 28 साल पहले परिवार वालों की इच्छा से आशाराम की गीता से शादी हुई थी।
हालांकि वह उससे अमित और राहुल दो पुत्र हुए थे। आशाराम की पांच बहनें हैं। उनसे अधिकांश की शादी दिल्ली में ही हुई थी। ऐसे में छुटपन से ही आशाराम भी दिल्ली ही रहता था। चार साल बाद आशाराम से दिल्ली की बेबी से शादी कर ली। वह दोनों पत्नियों से रिश्ता तो चला रहा था, लेकिन रहता वह दिल्ली में अपनी दूसरी पत्नी के पास रहता था। आशाराम ने करीब 15 साल पहले अपनी छह बीघा जमीन शहर के एक व्यक्ति को बेच दी थी। उसका दाखिल खारिज भी हो गया था। वहीं, लगभग दो साल पहले आशाराम ने गांव के ही दो लोगों को एक-एक बीघा जमीन बेच दी थी। इसका दाखिल खारिज न होने से उस पर पुरानी पत्नी और बेटों का ही कब्जा था। इसके बाद से पिता-पुत्रों और पहली पत्नी के बीच रार शुरू हो गई थी। पांच बीघा जमीन को बेचने के लिए भी लगातार आशाराम लोगों से संपर्क कर रहा था। बेटे और पत्नी इसका विरोध कर रहे थे।
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एक माह में दूसरी बार आया था आशाराम, पहली बार पत्नी बेबी को लेकर गांव में रह रहा था

आशाराम जमीन के सौदे के लिए दिसंबर से दो बार गांव आ चुका था। वह लगभग 25 दिन पहले अकेला गांव आया था। तब वह बची पांच बीघा जमीन का सौदा कर गया था। इसके बाद लगभग 12 दिन पहले पत्नी बेवी को लेकर पहली बार गांव आया था। घर में सभी एक साथ रह रहे थे। एक चूल्हे पर खाना भी बनाकर खाया जा रहा था, लेकिन जमीन को लेकर रोज कहासुनी चल रही थी। बताते हैं कि मंगलवार को आशाराम अपनी बची जमीन का बैनामा भी करना चाहता था। इसे लेकर ही रात से पिता और पुत्रों के बीच में झगड़ा चल रहा था। इसको लेकर कुछ दिन पहले झगड़ा भी हो चुका था। इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई थी।

दो दिन पहले कस्बे में एक मकान को देखकर भी आया था
सूत्रों के अनुसार, घर में लड़ाई होने के बाद से आशाराम परेशान था। उसे बेटे बार-बार कह रहे थे कि यदि पूरी जमी बेच रहे हो तो घर में अब न आना। इससे परेशान होकर इकदिल कस्बे में मकान लेने का आशाराम ने मन बना लिया था। वह दो दिन पहले कस्बे में एक मकान भी देखकर आया था।
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