इटावा। भरथना ब्लाॅक के अफसरों ने खेल मैदानों की स्थिति पर डीडीओ को फर्जी रिपोर्ट भेज दी। पेयजल और शौचालय की व्यवस्था न होने के बाद भी रिपोर्ट में सब ठीक बता दिया। जांच में झूठ पकड़ा गया तो अफसर भी सकपका गए। बीडीओ को नोटिस देकर स्पष्टीकरण तलब करने की तैयारी की जा रही है। सैफई के बरौली गांव में खेल मैदान की बाउंड्री अधूरी और क्षतिग्रस्त मिली है।
अमर उजाला ने सात जनवरी से जिले के खेल मैदानों की बदहाली पर अभियान शुरू किया था। इन खबरों काे संज्ञान में लेकर 19 जनवरी को जिलाधिकारी अवनीश राय ने सीडीओ ऐश्वर्या प्रणता को खेल मैदानों की बदहाली दूर करने के निर्देश दिए थे। कहा था कि फरवरी अंत तक सभी खेल मैदानों को दुरुस्त करा दिया जाए। जो खेल मैदान निर्माणधीन हैं उन्हें मार्च के अंत तक हरहाल में बनाकर तैयार कर लिया जाए।
डीएम के रुख को देखते हुए अफसरों ने सभी आठ बीडीओ को पत्र जारी करके खेल मैदानों को दुरुस्त कराने के निर्देश जारी कर दिए। ब्लाॅक अधिकारियों ने सात बिंदुओं पर रिपोर्ट भेजी। इसमें खेल मैदान में रनिंग ट्रैक, ओपेन जिम, बाउंड्रीवॉल, गेट, पेयजल, शौचालय और पौधरोपण/घास की व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराई गई।
भरथना ब्लाक से मेढ़ी दूधी ग्राम पंचायत में बने खेल मैदान की जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें खेल कर दिया गया। खेल मैदान में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था न होने के बाद भी रिपोर्ट में सुविधा की बात कही गई। यही नहीं मैदान में हरियाली दिखा दी गई। शनिवार को जिला विकास अधिकारी दीनदयाल ब्लाकों से मिली रिपोर्ट का सत्यापन करने पहुंचे तो हकीकत सामने आ गई। इस पर उन्होंने बीडीओ यदुवीर सिंह से नाराजगी जताई।
जिला विकास अधिकारी ने सैफई के बरौली कलां गांव में बन रहे खेल मैदान का भी निरीक्षण किया। यहां चहारदीवारी का काम अधूरा मिला। एक जगह बाउंड्री क्षतिग्रस्त भी मिली। इस पर उन्होंने गुणवत्ता पर सवाल उठाए। कहा कि काम को मानक के मुताबिक नहीं कराया जा रहा है। मौके पर मौजूद ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईडी) के अवर अभियंता विक्रांत को इसकी जांच करने और काम को गुणवत्तापूर्ण कराने के निर्देश दिए।
भरथना के मेढ़ी दूधी में बने खेल मैदान में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था नहीं मिली है। रिपोर्ट में यह दोनों होने की जानकारी दी गई थी। यहां के बीडीओ को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। सैफई के बरौली कलां गांव में बने खेल मैदान की चहारदीवारी निर्माणाधीन थी। जो हिस्सा बन गया था वह भी क्षतिग्रस्त मिला है। काम की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए जेई से कहा गया है। - दीनदयाल, जिला विकास अधिकारी।