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गैर इरादतन हत्या में पिता-पुत्र को सजा

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इटावा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनय कुमार द्विवेदी ने पांच साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए पिता-पुत्र को दोषी करार दिया है।
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कोर्ट ने उन्हें सात-सात साल की सजा और 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
जुर्माने की राशि से 30 हजार रुपये मृतक की पत्नी को दिए जाएंगे। जुर्माना अदा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मामले में एक आरोपी महिला को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने बरी कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि भरथना क्षेत्र के गांव सालिमपुरा निवासी सुनीता देवी ने 10 जून को भरथना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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आरोप था कि एक जून 2017 को उसके बच्चों व जेठ दयाराम के बच्चों के बीच विवाद हो गया था। इसके बाद दयाराम, उनके पुत्र दौलतराम, पत्नी बिटोली देवी व पुत्री राधा देवी घर में घुस आए।
दयाराम के हाथ में कुल्हाड़ी, दौलतराम के हाथ में बांका और बिटोली देवी व राधा के हाथों में लाठी-डंडे थे।
सुनीता के मुताबिक, उक्त लोगों ने घर में मौजूद पति इंदल सिंह को पकड़ कर मारपीट की और दयाराम ने उनके सिर पर कुल्हाड़ी से प्रहार कर दिया।
जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। शोर मचाने पर आसपास के लोग दौड़े। लोगों को आता देख हमलावर देख लेने की धमकी देते हुए भाग गए।
वह घायल पति को लेकर जिला अस्पताल पहुंचीं, जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने पीजीआई भेज दिया। सुधार न होने पर वह पति को इलाज के लिए आगरा फिर दिल्ली ले गईं।
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10 जून को दिल्ली से लौटते वक्त रास्ते में पति इंदल की मौत हो गई। सुनीता की तहरीर पर भरथना पुलिस ने दयाराम, उसके पुत्र दौलतराम, पत्नी बिटोली देवी व पुत्री राधा देवी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की।
विवेचना में पुलिस ने पुत्री राधा देवी की मौजूूदगी को गलत पाया। बाकी तीन के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किए।
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में हुई। शासकीय अधिवक्ता के द्वारा पेश किए साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सजा सुनाई।
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