तब से लेकर उदघाटन वाले दिन तक जो भी मरीज जांच कराने आए उनकी जांच हेल्प डेस्क कर्मियों ने की। आखिर इनकी लापरवाही अब सामने नजर आ रही है तो करीब सवा महीने बीतने के बाद सामने क्यों नहीं आई। उदघाटन वाले दिन जिस तरह से ब्लड निकालने के दौरान एक के बाद एक कई प्रिक लेनसेट ने भी काम नहीं किया था।
कुल मिलाकर जिला अस्पताल प्रशासन एक तरह से अपनी कमियों का ठीकरा हेल्प डेस्क कर्मियों के ऊपर फोड़ना चाहता है। जबकि इन्हें प्रशिक्षण तक नहीं देने की बात सामने आ रही है। मैनेजर का कहना है खून निकालना लैब टेक्निशियन का काम है, जिसकी तैनाती नहीं हुई है। जबकि ऑपरेटर उदघाटन वाले दिन अवकाश पर था।