फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इटावाः छह माह से दौड़ रहे पर नहीं बना राशन कार्ड

विज्ञापन
राम जानकी। संवाद - फोटो : ETAWAH
विज्ञापन
इटावा। कोरोना काल से भले ही सरकार मुफ्त राशन बांट रही हो, पर जिले में अभी भी गरीब राशन कार्ड बनवाने के लिए छह-छह माह से भटक रहे हैं। गुरुवार सुबह अफसरों के पहुंचने से पहले ही कई फरियादी पहुंच गए। जिला पूर्ति अधिकारी और दो लिपिकों के 10-15 मिनट देर से आने पर लोगों को इंतजार करना पड़ा। वहीं, कोआर्डिनेटर के लखनऊ प्रशिक्षण में जाने की वजह से कई फरियादियों को लौटा दिया गया।
विज्ञापन

लाल सिंह बसरेहर के नगला मेहंदी गांव निवासी लाल सिंह सुबह 09:55 बजे ही जिला पूर्ति कार्यालय पहुंच गए थे। 10 बजते ही है वह लिपिक कक्ष के बाहर जाकर खड़े हो गए, पर किसी के न होने से वह इंतजार करने लगे। बताया कि उनकी पत्नी ज्योति के नाम से राशन कार्ड है। करीब सात माह पहले ऑनलाइन न कराने की बात कहकर कार्ड काट दिया गया था। इसके बाद दोबारा आवेदन कराकर प्रिंट आउट भी निकलवा लिया, पर राशन नहीं मिल रहा। कम से कम 12 बार जिला मुख्यालय के चक्कर काट चुके हैं। आज भी समन्वयक न होने की बात कहकर लौटा दिया है।
हीरा चंदशहर के टीबी अस्पताल के पास रहने वाले हीरा चंद सुबह 10: 04 बजे कार्यालय पहुंच गए। लिपिक कक्ष में कोई नजर न आने पर वह कंप्यूटर कक्ष में गए। वहां समन्वयक और आपूर्ति निरीक्षक से मिलने की बात कही गई। इस पर वह इंतजार करने लगे। बताया कि अंत्योदय कार्ड बना है, पर कोटेदार ऑनलाइन न होने की बात कहकर पिछले छह माह से राशन नहीं दे रहा है। कार्यालय के छह माह से चक्कर काट रहे हैं पर हर बार टरका दिया जाता है।
विज्ञापन

बसरेहर कस्बे की रामजानकी अकेली रहती हैं। वह भी सुबह 10:10 बजे जिला पूर्ति कार्यालय पहुंच गई थीं। बताया कि उनकी बेटियां हैं और सभी की शादी हो चुकी है। करीब दो माह पहले राशन कार्ड काट दिया गया था। तब से राशन कार्ड बनवाने के लिए ब्लाक से लेकर जिला पूर्ति कार्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर बार बाबू जी टरकाकर भेज देते हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी सीमा त्रिपाठी ने कहा कि राशन कार्ड या यूनिट जोड़ने के लिए अभी जगह नहीं है। जगह होते ही नए लोगों को जोड़ने का काम किया जाएगा। वह और पूरा स्टाफ समय से आ जाता है। दो स्टाफ के लोग 10-15 मिनट देरी से क्यों आए, इस संबंध में उनसे जानकारी की जाएगी।

सुबह 10 बजकर पंद्रह मिनट पर खाली पड़ा जिला पूर्ति अधिकारी का कक्ष। संवाद- फोटो : ETAWAH

सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर खाली पड़ीं लिपिक कार्यालय की कुर्सियां। संवाद- फोटो : ETAWAH

लाल सिंह। संवाद- फोटो : ETAWAH

हीरा चंद। संवाद- फोटो : ETAWAH

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें