इटावा। बजट न होने से कूड़ा निस्तारण के लिए बनाया जा रहा मैटेरियल रिकवरी फेसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) अधूरा पड़ा है। एमआरएफ सेंटर न बन पाने से शहर में कई जगह डलावघर बनाए गए हैं, लेकिन इनमें कई-कई दिन तक कूड़ा सड़ता रहता है। इसकी बदबू से लोग परेशान हैं। इससे बीमारियों का भी डर सता रहा है।
शहर से प्रतिदिन 65 से 70 टन कूड़ा शहर से निकलता है। नगर पालिका परिषद ने इस कूड़े के निस्तारण के लिए शहर में एमआरएफ मैटेरियल रिकवरी फेसिलिटी सेंटर बनाने के लिए 33.67 लाख रुपये दिए थे, लेकिन इतने में निर्माण पूरा नहीं हो पाया। आधा अधूरा सेंटर बनने से ये रुपये भी कूड़े में चले गए। एमआरएफ सेंटर न बन पाने से शहर का कूड़ा पक्केबाग, बलराम सिंह चौराहे पर बने डलावघर में डाला जाता है।
इस कूड़े को हर दिन उठाने की व्यवस्था नहीं है। कई दिन सड़ने के बाद इसे उठाकर कामेत में बने कूड़ा निस्तारण प्लांट में डंप कर दिया जाता है। सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉ. अवधेश ने बताया कि बारिश के मौसम में गीला कूड़ा सड़ने से मच्छरों जनित बीमारियों का सबसे ज्यादा डर सताता है। इसके साथ ही फंगस इंफेक्शन भी हो सकता है। यदि कूड़े में खाने पीने का सामान भी सड़ रहा है तो उड़ने वाला वायरस भी लोगों को बीमार कर देता है।
ऐसे लागू होनी थी योजना
वर्ष 2019 में स्वच्छ भारत मिशन ने इटावा जिले का चयन मॉडल के तौर पर किया गया था। कूड़ा निस्तारण योजना में घरों से गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्रित करने के लिए शहर में जागरूकता अभियान चलाया जाना था। नगर पालिका से कूड़ा इकट्ठा करने के लिए जो गाड़ी आएगी, उसमें भी सूखे और गीले कूड़े के लिए अलग अलग डिब्बे लगेंगे। गीले कूड़े से खाद आदि बनाकर उसका उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जाएगा।
सूखे कूड़े को एमआरएफ सेंटरों में ले जाया जाएगा। वहां आधुनिक मशीनों से कूड़े को अलग-अलग किया जाएगा। इससे निकलने वाले तत्वों को कबाड़ में बेचा जाएगा। दोनों प्रकार से होने वाली आमदनी को ही कूड़ा निस्तारण में खर्च किया जाएगा। इसका संचालन करने के लिए मोहल्ले में एक समिति भी बनेगी। मंशा थी कि कूड़ा संकलन और निस्तारण में खर्च होने वाली बड़ी राशि की बचत होगी। इस पैसे को नगर पालिका विकास कार्यों पर खर्च कर सकेगी।
बलराम सिंह चौराहे पर किताबों की दुकान करने वाले राजकपूर रावत ने बताया कि 30 मीटर की दूरी पर ही डलावघर है। यहां डंप कूड़े की बदबू से परेशान रहते हैं। बारिश में कूड़ा भीगने से बदबू और बढ़ जाती है। बीमारियां फैलने का भी डर सताता रहता है। सुंदरपुर मोड़ के पास रहने वाले फर्नीचर कारोबारी शिवम यादव का कहना है कि एमआरएफ सेंटर का काम अधूरा है। नगर पालिका की जगह में लगातार कूड़ा डाला जाता है। कूड़े की बदबू से पूरे क्षेत्र के लोग परेशान हैं। कई-कई दिन तक कूड़ा नहीं उठता है।
एमआरएफ सेंटर बनाने के लिए नगर पालिका ने 33.67 लाख रुपये स्वीकृत हुए। एक सेंटर इस राशि से बनना था। बाकी सेंटरों के निर्माण की राशि नगर पालिका को खुद ही खर्च करनी थी। स्वीकृत धनराशि से शिवा कालोनी में एमआरएफ सेंटर बनाया गया। रुपये सारा खर्च हो गया, लेकिन सेंटर अभी तक अधूरा पड़ा है। यही हाल अन्य सेंटरों का भी है। कहीं आधे अधूरे हैं तो कहीं तो बनने शुरू ही नहीं हुए।
शिवा कालोनी के सेंटर में मशीनें लगाने के लिए साढ़े 17 लाख रुपये की मांग की गई है। यह धनराशि अभी तक नहीं आई है। इस वजह से वह सेंटर भी कबाड़ होता जा रहा है। सुंदरपुर में अधबने सेंटर में कूड़ा निस्तारण तो हो नहीं सका बल्कि वह कूड़ा सड़ाने के काम आ रहा है। यही हाल मेवाती टोला और अन्य सेंटरों का है।
स्वच्छता मिशन के डीपीएम सुनील कुमार ने बताया कि शिव कालोनी सेंटर पर मशीनों के न लग पाने से काम शुरू नहीं हो सका। मशीनों के लिए साढ़े 17 लाख रुपये शासन से आने हैं। धनराशि आने के बाद ही काम शुरू होगा। अन्य सेंटरों के लिए राज्य वित्त से नगर पालिका को पैसा स्वीकृत करना है। राज्य वित्त में अभी बजट न होने के कारण काम प्रभावित है। शासन से बजट आने के बाद ही काम शुरू होगा।
कई बार शासन से बजट मांगा गया है। बजट न आने की वजह से एमआरएफ सेंटर का काम पूरा नहीं हो सका है। कूड़ा समय से उठवाने के निर्देश दिए हुए हैं। ईओ से बात करके बारिश में कम से कम दिनों में कूड़ा उठवाने की व्यवस्था की जाएगी। नौशाबा खानम, चेयरमैन, नगर पालिका इटावा।
बलराम सिंह चौराहे पर डलाव घर के बाहर पड़ा कूड़ा। संवाद- फोटो : ETAWAH