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Etawah News: पर्यावरण प्रहरी कर रहे संरक्षण, जिम्मेदार सिर्फ पूरा कर रहे लक्ष्य

Mon, 05 Jun 2023 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो 18::: फोटो 19:::: पर्यावरण दिवस पर विशेष
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। पर्यावरण दिवस पर हर साल लाखों पौधे रोपकर अधिकारी लक्ष्य पूरा कर देते हैं, लेकिन उनकी देखभाल ठीक से न होने की वजह से आधे पौधे सूख जाते हैं। आधे पौधे से पौधे ही पेड़ बन पाते हैं। वहीं शहर के कुछ पर्यावरण प्रहरी पौधे रोपित कराने के साथ उनके संरक्षण का ध्यान रखकर भी अपनी पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
पर्यावरण दिवस पांच जून को मनाया जाता है। इस दिन लोग धरा को हरा भरा रखने का संकल्प लेते हैं और पौधरोपण करते हैं, लेकिन समय बीतने के साथ ही पौध रोपण करने वाले यह भूल जाते हैं। उपेक्षा की वजह से ज्यादातर पौधे कुछ समय बाद ही दम तोड़ देते हैं। पिछले साल करीब 60 लाख पौधों का रोपण विभिन्न विभागों की ओर से किया गया था।
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सभी विभागों ने पौधे लगवाकर अपना लक्ष्य तो पूरा कर दिया, लेकिन उसके बाद जिम्मेदारों ने उनकी सुध तक नहीं ली। यही वजह से है कि बड़ी संख्या में पौधे उसी समय खराब हो गए तो कुछ पौधे कुछ समय बाद। आधे से भी कम पौधे पेड़ बनकर प्रकृति को हराभरा बनाने का काम कर रहे हैं।
वहीं, समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो पर्यावरण प्रहरी बनकर प्रकृति को सुंदर बना रहे हैं। पौध रोपण के साथ ही उनकी सुरक्षा भी समय- समय पर करते रहते हैं। सामाजिक संस्था बनाकर इस मुहिम से अन्य लोगों को भी जोड़ रखा है। समय- समय पर ग्रामीण क्षेत्रों में गोष्ठियों का आयोजन करके लोगों को जागरूक करने की मुहिम भी चलाते रहते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ पर्यावरण प्रहरियों के बारे में।
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फोटो 14::: संख्या रंजीत यादव
संकल्प के साथ 2017 से शुरू की मुहिम
फरवरी 2018 में साढ़े तीन लाख पौधे लगाने तक अन्न ग्रहण नहीं करने का संकल्प लेने वाले रंजीत यादव का यह संकल्प अक्टूबर-2022 में पूरा हुआ। वह पौधरोपण निरंतर कर रहे हैं। बताया एक फरवरी 1978 उनका जन्म दिन है। 2017 में जन्मदिन के दौरान ऐसा विचार आया कि अगले साल एक फरवरी को पौधा लगाएंगे। इसके लिए एक फरवरी 2018 को पौध लगाने से पहले एक बड़ा यज्ञ का आयोजन करवाया। एचएन नगर निवासी रंजीत यादव ने अचानक से यह निर्णय लिया कि अब तक वह जितनी सांसें ले चुके हैं उसके बराबर यानी साढ़े तीन लाख जब तक पौधे लगा नहीं लेंगे, तब तक अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इसके बाद उन्होंने हर घंटे एक पौधा लगाना शुरू किया। नेल्स फाउंडेशन संस्था के माध्यम से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में पौधे लगाए व बांटे। पौधे ज्यादातर कटहल, आम, अमरूद के अलावा पीपल, नीम, अर्जुन, बरगद आदि हैं। तुलसी के पौधे भी वितरित किए। बताया कि उनके लगाए गए करीब 70 प्रतिशत पौधे जीवित हैं।
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फोटो संख्या 15 रवींद्र चौहान।
नुक्कड़ नाटक से कर रहे जागरूक
जल, जीव, जंगल और जीवन को बचाने के लिए वर्ष 2019 में भूमिजा फाउंडेशन का गठन करने वाले लघु फिल्म निर्माता, निर्देशक व सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र चौहान मार्च 2023 तक 1510 पौधे रोपित व भेंट कर चुके हैं। ग्रीन डॉट्स, रेड डॉट्स ब्लू डॉट्स अभियान के माध्यम से हरियाली, रक्तदान, जल पर काम कर रहे हैं। ग्रीन डॉट्स अभियान के अंतर्गत अब तक लगभग 1100 पौधे वृक्ष के रूप संरक्षित हैं। उन्हें इस कार्य के लिए विभिन्न संस्थाएं सम्मानित कर चुकी हैं। पीपल, नीम, जामुन, पाखर, बेल आदि के अधिक पौधे लगाए हैं। इनमें पीपल के लगभग 400 पौधे रोपित कर चुके हैं। पौधों के संरक्षण के लिए देश भर में लगभग 550 नुक्कड़ नाटक कर चुके हैं। कई संस्थाएं उन्हें पुरस्कृत कर चुकीं हैं।
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फोटो संख्या 16 जय शिव मिश्र।
1100 पौधे लगाए, ज्यादातर वृक्ष का रूप ले चुके
आनंद किशोर स्मृति समाज सेवा संस्थान के सचिव जय शिव मिश्र विभिन्न स्थानों पर लगभग 1100 पौधे लगा चुके हैं। कहा कि मानव जीवन तभी सार्थक है जब लोग पौध रोपण करें और उनकी देखभाल बच्चे की तरह करें। तभी लगाए गए पौध वृक्ष बन सकते हैं। जय शिव मिश्र ने कहा कि वातावरण में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने पर मानव जीवन बहुत कष्टदाई होगा। इसके लिए सभी को बढ़ चढ़कर पौधरोपण करने पर जोर देना होगा। जल संरक्षण पर कहा कि हर व्यक्ति को जल संरक्षण के ऊपर ध्यान देना चाहि। आने वाली पीढ़ी को जल संकट से बचाने के लिए अभी से ध्यान देना होगा। इसके लिए पानी की एक- एक बूंद को बर्बाद होने से बचाना होगा। पानी बचेगा तभी मानव जीवन और पेड़ों के जीवित रहने के बारे में सोच सकते हैं।
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फोटो संख्या 17 राकेश त्रिपाठी।
200 पौधे किए भेट, लोगों को कर रहे जागरूक
पीपल सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राकेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें बचपन से प्रकृति के प्रति काफी प्रेम रहा है और पौधे लगाते थे। जो अब भी जारी है। कई गांवों में पौधे लगाने के लिए किसानों से संपर्क करते हैं और बताया उन्होंने पीपल, पाखर, सागौन, सहजन, अमरूद, आम, जामुन, बरगद, नीम, बेलुआ समेत कई प्रकार के और लंबी अवधि वाले फलदार और छायादार पौधों का रोपण कर चुके हैं। वर्ष 2016 से अब तक लगभग 1, 000 पौधों को लगा चुके हैं। खुशी की बात यह है कि इनमें से लगभग 900 पौधे जीवित हैं। बताया कि वह पौधे लगाते ही नहीं बल्कि उसे बड़ा करके वृक्ष बनने तक उसकी पूरी देखभाल भी करते हैं। लगभग 200 पौधे लोगों को भेंट भी कर चुके हैं। विभिन्न सामाजिक संस्थाएं उन्हें सम्मानित भी कर चुकी हैं।
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