महेवा। क्षेत्र पंचायत सदस्यों की आपत्ति के बाद जिलाधिकारी ने महेवा ब्लॉक में चल रही टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
29 सितंबर को ब्लॉक क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में कुल 21 कामों के टेंडर जारी किए गए थे। इस पर करीब एक सप्ताह पहले बीडीसी सदस्य रमादेवी दोहरे के नेतृत्व में तीन दर्जन क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने जिलाधिकारी के सामने आपत्ति दाखिल की थी। आरोप था कि गुपचुप तरीके से पक्षपात पूर्ण टेंडर कराए जा रहे हैं। गुरुवार को करीब दर्जन भर क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने बीडीसी देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी से फिर मुलाकात की और टेंडर प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
जिलाधिकारी अवनीश राय ने शुक्रवार को टेंडरों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। समिति में उपायुक्त स्वत: रोजगार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग व वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा को शामिल किया है। एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी अवनीश राय ने खंड विकास अधिकारी महेवा को जांच होने तक टेंडर प्रक्रिया स्थगित करने का निर्देश दिया है। बीडीसी देवेंद्र सिंह ने बताया कि सदस्यों की शिकायत पर टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए जिलाधिकारी ने कमेटी का गठन किया है।
...तो कुलपति ने कहां दर्ज करा दिया मुकदमा
सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रभात कुमार सिंह फर्जी गारंटी लगाने वाली एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का दावा कर रहे हैं। जबकि सैफई थाना प्रभारी रमेश सिंह अभी तक तहरीर न मिलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कुलपति ने मुकदमा दर्ज कराया तो कहां।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक सितंबर 2022 से नई एजेंसी को ठेका देने का फैसला लिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय में तैनात कर्मचारियों को हटाए जाने की बात सामने आई थी। कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। प्रयागराज की निश्चल सुविधा सर्विसेज लिमिटेड कंपनी को ये टेंडर मिला था। नई कंपनी ने 40 लाख रुपये की बैंक गारंटी लगाई थी। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने जब बैंक गारंटी से जुड़े कागजों की जांच की तो ये फर्जी निकली थी, जिसके बाद एजेंसी का टेंडर निरस्त कर पुरानी एजेंसी को दे दिया गया था।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ प्रभात कुमार सिंह ने वित्त निदेशक विजय श्रीवास्तव का बचाव कर कहा कि उन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वह निराधार हैं। ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारी अधिकारियों के खिलाफ गलत सूचना फैला रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करेंगे। सैफई थाना प्रभारी रमेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है और न ही कोई मुकदमा दर्ज किया गया है।