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Etawah News: सीएमओ कार्यालय में बेंच और व्हीलचेयर तलाशते रहे दिव्यांग

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इटावा। बारिश की संभावना के बावजूद सोमवार को दिव्यांग दूर-दूर दराज इलाकों से सीएमओ कार्यालय प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे। उम्मीद थी कि हाकिम की चौखट पर व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त मिलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सीएमओ कार्यालय की चौखट से लेकर अंदर तक उन्हें घिसटना पड़ा। व्हीलचेयर और बेंच तक पर्याप्त संख्या में नहीं थीं।
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सप्ताह में एक दिन सीएमओ कार्यालय में दिव्यांगों का प्रमाणपत्र बनाने के लिए सीएमओ कार्यालय में शिविर लगता है। इस दिन डॉक्टरों का पैनल बैठकर जांच करता है और प्रमाणपत्र के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान करता है। सोमवार को खराब मौसम के बावजूद 50 दिव्यांगों ने प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया। सबसे ज्यादा 36 पैर से दिव्यांग आए, जिनका अस्थि रोग चिकित्सक डॉ. पंकज गुप्ता ने परीक्षण किया। जबकि नेत्र रोग चिकित्सक डॉ. गौरव द्विवेदी व कान रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी चौधरी ने सात-सात दिव्यांगों का परीक्षण किया। कम सुनाई देने वाले दिव्यांगों को सैफई मेडिकल कॉलेज ऑडियोमेट्री से जांच कराने की सलाह दी गई।
सीएमओ कार्यालय पहुंचे दिव्यांग चिकित्सकों के कक्ष तक घिसटते हुए पहुंचे। व्हीलचेयर संख्या सिर्फ 10 होने की वजह अधिकांश को उपलब्ध नहीं हो सकीं। इसी तरह अंदर जो बेंचें थीं उन पहले से लोगों के बैठे होने के कारण कई को जमीन पर ही घंटों बैठे रहना पड़ा। शिविर होने के बाद भी व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया।
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सीएमओ कार्यालय के गेट के पास बैठे सिरहौल जसवंतनगर से आए बबलू ने बताया कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने आए हैं। वर्ष 2012 में हादसे के दौरान एक पैर खराब हो गया था। करीब एक घंटे से पेड़ के नीचे चबूतरे पर बैठे हैं। अंदर बेंच तक पर्याप्त नहीं हैं। कोई पानी पूछने वाला तक नहीं है। व्हीलचेयर न होने से घिसटकर अंदर जाना पड़ेगा।




बसरेहर क्षेत्र के गांव रामनगर- खुड़ीसर से आए करन सिंह ने बताया कि 2011 में अहमदाबाद में कार्य करते थे। हादसे के दौरान उल्टे पैर का पंजा कट गया था। दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं होने की वजह से आवास नहीं मिल सका। पहली बार दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने आए हैं। सुबह नौ बजे के आए हैं, 11 बज रहा है। बैठने के लिए बेंच तक नसीब नहीं हुई।





कार्यालय में आने वाले दिव्यांगों के बैठने की व्यवस्था है। कुर्सियों पर साथ आए लोगों के बैठने की वजह से हो सकता है कि कुछ दिव्यांगों को बाहर बैठना पड़ता हो। साथ आए लोगों को चाहिए कि बैठने का स्थान दिव्यांगों के लिए छोड़ दें।
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- डॉ. गीताराम, सीएमओ।
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