सैफई। उत्तर-प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में सीटी स्कैन मशीन खराब होने से तीमारदार मरीजों को तीन गुने दाम खर्च करके निजी केंद्रों पर जांच कराने के लिए मजबूर हैं। हालांकि विवि प्रबंधन का कहना है कि वह सरकारी एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजकर मरीजों की जांच करा रहे हैं।
आयुर्विज्ञान विवि के इमरजेंसी के ट्रामा सेंटर में वर्ष 2007 से सीटी स्कैन की सुविधा शुरू हुई थी। 16 साल पुरानी मशीन में काफी समय से दिक्कत आ रही है। कई बार यह खराब हो चुकी है। अब करीब एक महीने से यह खराब पड़ी है।
ऐसे में मरीजों व उनके तीमारदारों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही। इस मशीन से जहां एक हजार रुपये में सीटी स्कैन कराया जा सकता था। वहीं अब तीमारदार प्राइवेट सेंटरों से मरीजों का तीन हजार रुपये तक में सीटी स्कैन करा रहे हैं। तीमारदार की शिकायत पर प्रबंधन की ओर से मशीन को दो-चार दिन में ठीक कराने का भरोसा दे दिया जाता है। नए आने वाले मरीज या उनके तीमारदार सीटी स्कैन कक्ष में ताला लटकता देख मायूस हो रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा प्रमुख ने मशीन बदलवाने का दिया था आश्वासन
जुलाई 2021 में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव आलोक कुमार इस विश्वविद्यालय का निरीक्षण करने आए थे। अमर उजाला ने तब सीटी स्कैन आदि अन्य मशीनों के खराब होने की बात कही थी। तब प्रमुख सचिव ने जानकारी दी थी कि पुरानी हो चुकी सीटी मशीन की जगह नई मशीन लगाने के निर्देश दे दिए हैं, लेकिन नई मशीन अब तक नहीं लगी।
तीमारदारों ने बताई परेशानी
वाहुथ निवासी जयशंकर ने बताया कि मां रेखा देवी को गत 31 दिसंबर को न्यूरोलॉजी विंग के बेड नंबर 18 पर भर्ती कराया था। डॉक्टर ने सीटी स्कैन कराने को कहा, लेकिन यहां मशीन खराब होने की वजह से 2200 रुपये खर्च कर निजी सेंटर से स्कैन कराकर लाए हैं।
- नगला सवा निवासी किसान सुरेंद्र ने बताया कि वह औरैया निवासी एक रिश्तेदार को दिखाने आए थे। रिश्तेदार के सिर में चोट लगी थी। ऐसे में डॉक्टरों ने सीटी स्कैन लिखा था, लेकिन विश्वविद्यालय की इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में लगी मशीन खराब होने की वजह से बाहर 2500 रुपये में जांच कराई है।
नई मशीनों के लिए मांग की गई है। जल्द ही नई मशीनें मिलने की उम्मीद है। साथ ही इस मशीन सही कराने का प्रयास किया जा रहा है। - प्रो./डॉ. प्रभात सिंह, कुलपति, आयुर्विज्ञान विवि