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नहर में तलाशा गुजरात के बैंक का खजाना

Tue, 27 Mar 2018 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इटावा
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जेसीबी से नहर की खुदाई कराती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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चौबिया(इटावा)। अहमदाबाद (गुजरात) से गायब हुई एचडीएफसी बैंक की कैश वैन में मौजूद 98.10 लाख रुपये की तलाश में पुलिस ने राइन नहर से जुड़ी माइनर और उसके किनारे को खंगाल डाला। हालांकि दो घंटे की मशक्कत के बाद भी पुलिस इस रकम तक नहीं पहुंच सकी। एचडीएफसी के एटीएम को फीड करने वाली वैन 23 फरवरी को अहमदाबाद से गायब हुई थी। पुलिस ने वैन ड्राइवर मैनपुरी के करहल निवासी राम नरेश के बेटे मुकेश कुमार को गिरफ्तार कड़ाई से पूछताछ की तो उसने वैन में मौजूद 98 लाख 10 हजार रुपये इटावा के चौबिया थाना क्षेत्र की राइन नहर से जुड़ी माइनर के किनारे जमीन में छिपाने की जानकारी दी। मुकेश को लेकर पहुंची गुजरात पुलिस ने सूख चुकी नहर और साइड पटरी के काफी हिस्से में जेसीबी से खुदाई कराई। रकम न मिलने पर मुकेश को लेकर पुलिस लौट गई। माना जा रहा है कि कुछ और ठिकानों पर रकम की तलाश की जाएगी।

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दो घंटे दो किलोमीटर तक चली खुदाई
चौबिया (इटावा)। अहमदाबाद (गुजरात) से गायब हुई एचडीएफसी बैंक की कैश वैन में मौजूद 98 लाख 10 हजार रुपये की तलाश में पुलिस ने राइन नहर से जुड़ी माइनर को दो घंटे खंगाला। नहर के किनारे पटरी पर लगभग दो किलोमीटर भाग में जेसीबी मशीन से खुदाई की गई, लेकिन बैंक का खजाना न मिलने पर पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
अहमदाबाद में एचडीएफसी के एटीएम को फीड करने वाली वैन 23 फरवरी को गायब हुई थी। बैंक की ओर से एफआईआर कराने पर पुलिस ने वैन चलाने वाले मैनपुरी के करहल निवासी राम नरेश के बेटे मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया था। उसने बैंक का कैश नहर किनारे मिट्टी से दबा देने की जानकारी दी थी। गुजरात पुलिस उसे रिमांड पर लेकर इटावा पहुंची और चौबिया थाने की फोर्स के साथ माइनर के किनारे दो किलोमीटर तक जेसीबी मशीन से खुदाई कराई लेकिन कैश नहीं मिला। चौबिया थानाध्यक्ष सतीश यादव का मानना है कि अभियुक्त मुकेश पुलिस को गुमराह कर रहा है।
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झाड़ियां साफ, पेड़ उखड़े
 चौबिया(इटावा)। बैंक के खजाने की तलाश में पुलिस ने जब राइन नहर से जुड़ी माइनर के किनारे दो घंटे खुदाई कराई तो वहां मौजूद झाड़ियां देखते-देखते साफ होती चली गईं। खुदाई के लिए जेसीबी मशीन दौड़ाए जाने से नहर के सूखे भाग में मौजूद कई पड़े भी धराशाई हो गए। ग्रामीणों को झाड़ियां साफ होना भाया तो पेड़ गिराए जाना अखरता रहा।
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