इटावा। विशेष न्यायाधीश विकास सक्सेना ने पुलिस टीम पर हमला करने के करीब नौ वर्ष पुराने मामले में सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 30/31 जुलाई 2008 की रात एसओ सैफई संजीव लोचन त्यागी फोर्स के साथ शांति व्यवस्था में वांछित अभियुक्तों की तलाश में थे। जब वह हेंवरा बार्डर ड्यूटी चेक करके चौ. चरणसिंह डिग्री कालेज के पास बने रामपाल के ढाबे के पास पहुंचे तो रामपाल व उनके भाई समेत आठ-दस लोग शराब पी रहे थे। जब एसओ ने खुलेआम शराब पीने से मना किया तो उनमें विवाद होने लगा। उक्त लोगों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इस मामले में दर्ज कराए गए मुकदमे में रामपाल, मिलाप सिंह, जयपाल, विजय, अजय उर्फ सतेंद्र, कमलेश उर्फ कुमदेश पुत्र छक्कीलाल निवासी नगला छबिनाथ सैफई और लालजी उर्फ लालसिंह पुत्र बलवंत उर्फ जसवंत सिंह यादव निवासी नगला केहरी को आरोपी बनाया गया था। विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विशेष न्यायाधीश विकास सक्सेना की कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी इम्तियाज अहमद अंसारी अपने तर्काें के जरिये वाद को सिद्ध करने में सफल रहे। इस पर न्यायाधीश ने रामपाल, मिलाप सिंह, जयपाल, विजय, अजय उर्फ सतेंद्र, कमलेश उर्फ कुमदेश व लालजी उर्फ लालसिंह को तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई साथ ही पांच-पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।