थाना क्षेत्र के ग्राम सुंदरा में राजवीर की हत्या से पूर्व भी दोनों पक्षों का मामला पुलिस के पास पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई।
तीन माह पूर्व थाना ऊसराहार के एक दरोगा को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश पनपा था। उन्होंने दरोगा पर आरोपी युवक से मिलीभगत का आरोप लगाया था। लेकिन प्रार्थना पत्र देने के बाद भी युवक के विरुद्ध पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मृतक के भाई रामवीर ने पत्नी से छेड़खानी का मुकदमा 31 जुलाई को थाना ऊसराहार में हत्यारोपी के विरुद्ध लिखवाया था। जिस पर पुलिस ने मामले को झूठा मानकर खत्म कर दिया। इसके बाद हत्यारोपी आमोद ने पत्नी से छेड़खानी का मुकदमा 4 अगस्त को राजवीर और विकलांग रामवीर के विरुद्ध दर्ज कराया था। इसे भी पुलिस ने खत्म कर दिया। दोनों के बीच विवाद पनपता ही चला गया। यही राजवीर की हत्या का सबब बन गया। एसएसपी ने बताया कि पूर्व में पीड़ित परिवार ने जो भी शिकायत की है, उन पर क्या कार्रवाई की गई इसकी जांच होगी। हत्या में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए निर्देश दिए गए हैं।