इटावा। इकदिल थाना क्षेत्र के गांव पिलखर में शनिवार की रात हुई होटल मालिक व सपा नेता की हत्या में मृतक की पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने तीन चचेरे भाइयों सहित चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। हत्या का प्रमुख कारण जमीन का विवाद बताया गया है। घटना के बाद से सभी आरोपी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार उनके संभावित स्थानों पर दबिंशें दे रही है। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाने के लिए कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। उधर, पुलिस ने रात को ही शव का पोस्टमार्टम करा दिया। रविवार की सुबह मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। होटल मालिक की हत्या से पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है।
क्षेत्र के गांव पिलखर निवासी व हाईवे के किनारे स्थित मोती महल होटल के मालिक अखिलेश कुमार यादव पुत्र राम लखन यादव शनिवार की रात करीब साढ़े आठ बजे अपने होटल से कार से अपने घर के लिए निकले थे। जब वह अपने दरवाजे के करीब पहुंचे। तभी पहले से घात लगाए हमलावरों ने उसे पकड़ लिया। उसके सटाकर गोली मार दी। हमलावरों ने एक उसके सिर में व दूसरी गर्दन में कुल दो गोली मारी । गोली लगते ही वह वह वहीं पर गिर पड़ा। पच्चीस कदम की दूरी पर स्थित घर में मौजूद लोगों को इसकी जानकारी हुई तो वह उसे एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। जहां डाक्टरों ने उसके मरने की पुष्टि कर दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। अस्पताल पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया। मृतक की पत्नी मंजू देवी ने चचेरे देवर अमित कुमार यादव उर्फ बउया , अनुज उर्फ बौना पुत्रगण दलवीर सिंह यादव, मितेश यादव उर्फ गट्टे पुत्र राजेंद्र सिंह के अलावा गांव के ही मोनू उर्फ रिषी पुत्र सुखवीर सिंह निवासी पिलखर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
चाचा की जमीन अपने नाम कराने का था शक
क्षेत्र के गांव पिलखर निवासी अखिलेश का अपने ही चचेरे भाइयों से जमीन को लकर विवाद चल रहा था। अखिलेश के पिता पांच भाई हैं जिसमें सबसे बड़े भाई अखिलेश के पिता राम लखन दूसरे लल्लू सिंह यादव तीसरे नंबर पर किताब सिंह चौथे नंबर पर दलवीर सिंह व पांचवें नंबर पर राजेंद्र सिंह हैं। किताब सिंह यादव की शादी नहीं हुई है। वह फौज में थे लेकिन उनका लगाव शुरू से अखिलेश की ओर था। उन्होंने अखिलेश के नाम कानपुर स्थित मकान भी नाम कर दिया था। इसके अलावा उन्हाेंने अपनी नौकरी में मिला पैसा भी अखिलेश को दे दिया था। सभी भाइयों के नाम छह-छह बीघा जमीन है। बाकी के भाइयों को शक था कि किताब सिंह अपने हिस्से की जमीन भी कहीं उनके नाम न कर दें। इस बात को लेकर उनमें आपस में विवाद होता रहता था। किताब सिंह अखिलेश के पास ही रहते थे। बताया गया है कि इसी विवाद के कारण करीब चार साल से अखिलेश के पिता को अपने भाई लल्लू सिंह, राजेंद्र सिंह व दलवीर सिंह से खान पान बंद चल रहा था। इस घटना में राजेंद्र सिंह के पुत्र मितेश के अलावा दलवीर सिंह के दो पुत्रों अमित व अनुज को आरोपी बनाया गया है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।
सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात
किसी अनहोनी को आशंका को देखते हुए उनके घर के पास पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। अखिलेश के घर के सामने ही उनके चाचाओं के मकान है । फिर कोई घटना न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस को तैनात किया है। अखिलेश की मौत के बाद से गाव में सन्नाटा पसरा है। कोई भी कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।
हमलावरों को थी होटल मालिक की पूरी जानकारी
अखिलेश यादव के बारे में हमलावरों को उसकी पूरी गतिविधियों के बारे में जानकारी थी। बताया गया है कि अखिलेश रोजाना करीब आठ बजे के आसपास अपनी कार से घर जाता था। वहा कुछ देर रुकने के बाद अपनी पत्नी व बच्चों को कार में बैठा कर उन्हें होटल ले आता था और रात को वही पर रुकता था। सुबह ही वह बच्चों व पत्नी को घर छोड़ जाता था। अखिलेश करीब साढे़ सात बजे अपने घर के लिए निकला । घर के बाहर गली में उसने अपनी कार खड़ी की और पैदल घर के लिए निकला। कार खड़ी होने के स्थान से उसका घर करीब सौ कदम की दूरी पर था। घर से करीब पचास कदम की दूरी पर ही पहुंचा था तभी हमलावरों ने उसे पकड़ लिया और उसके गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर भाग निकले। एसओ इकदिल अनिल कुमार ने बताया कि उसको दो गोलियां लगी थीं जिसमें एक गांली सिर में व दूसरी गर्दन में लगी। दोनों गोलियां पार हो गईं। उन्होंने बताया कि अभी इस बात की जानकारी नहीं हो सकी कि गोली कौन सी थी। बताया जाता है कि तमंचे से सटाकर गोलियां मारी गई हैं।