अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। भ्रष्टाचार के मामले में फंसे निलंबित एआरटीओ व लिपिक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहे है। उनके खिलाफ शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। उन पर कार के रजिस्ट्रेशन की फीस और पत्रावली भी गायब करने का आरोप है।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला न्यू चौगुर्जी में रहने वाले अधिवक्ता अश्विनी सिंह पुत्र दिगम्बर सिंह ने दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया कि उसने एक नई हुंडई की क्रि स्टा कार खरीदी थी। उसके रजिस्ट्रेशन के लिए उसने तत्कालीन एआरटीओ हिमांशु जैन व लिपिक बेबी को पत्रावली सहित 81 हजार रुपया फीस 15 मार्च 2018 को दिए थे। लेकिन उसकी कार का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया।
वहीं, 18 मार्च को पुलिस का एआरटीओ कार्यालय पर छापा पड़ गया। इससे दोनों एआरटीओ के अलावा एक प्राइवेट कर्मी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसके बाद कार्यालय को सीज कर देने के कारण कामकाज बंद हो गया था। करीब दस दिन के बाद कार्यालय खुल सका था। अश्विनी सिंह ने बताया कि उसके बाद वह कार्यालय गया तो वहां पर उसे न तो उसकी पत्रावली मिली और न ही उसका रजिस्ट्रेशन किया गया है। उनका आरोप है कि उसके रुपया एआरटीओ ने हड़प लिए और उसका काम भी नहीं किया।
थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर उसने कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने हिमांशु जैन व बाबू बेबी के खिलाफ धारा 406 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
कोर्ट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने लिखा मुकदमा
रजिस्ट्रेशन के लिए दी फीस को हड़पने व पत्रावली गायब का आरोप