अमर उजाला ब्यूरो
इटावा।
अपर सत्र न्यायाधीश विकास सक्सेना ने हत्यारोपी पुत्र को पिता की हत्या के आरोप में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी देवेंद्र सिंह राजावत ने 23 नवंबर 2013 को सहसों थाने में मामला दर्ज कराया था कि 22 नवंबर 2013 को वह अपने परिवार के साथ ससुराल गया था। घर में उसके पिता लाखन सिंह तथा भाई अरविंद्र सिंह राजावत मौजूद थे। अरविंद्र सिंह मंद बुद्धि का है जो अक्सर परिवार के लोगों से छोटी-छोटी बातों पर झगड़ता रहता था। रात को जब उसके पिता टिन शेड में सोए थे तो उसके भाई अरविंद्र ने पिता के ऊपर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।
पिता के चिल्लाने पर मोहल्ले के लोग आ गए। इन लोगों ने देखा कि उसके भाई ने कुल्हाड़ी मारकर पिता की हत्या कर दी। पुलिस ने विवेचना के उपरांत मामले को सुनवाई के लिए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में गवाहों के बयान व प्रस्तुत किए साक्ष्यों के साथ अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे शासकीय अधिवक्ता संजय दुबे ने सिद्ध किया।
- परिवार के लोगों से छोटी-छोटी बातों पर झगड़ता रहता था।