पचास दिन पहले रेडीमेड व्यापारी के अपहरण के मामले का शुक्रवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। पुलिस का कहना है कि देनदारी और पारिवारिक कलह से बचने के लिए ही व्यापारी ने सारा ड्रामा रचा।
ऊसराहार थाना क्षेत्र के ऊसराहार-भरथना मार्ग निवासी रेडीमेड एवं सराफा व्यापारी राजपाल यादव 15 अप्रैल को अचानक लातपा हो गए थे । 16 अप्रैल को उनकी कार मैनपुरी के बेवर के पास एक पेट्रोल पंप से मिली थी।
कार में एक खून से सना हुआ चाकू एवं कुछ कटे हुए बाल बरामद हुए थे। इसके बाद राजपाल के भाई गौरव की तहरीर पर अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया था।
मामले में पुलिस जब जांच में जुटी कई तथ्य सामने आए थे। कस्बे के तमाम व्यापारियों ने थाने जाकर राजपाल यादव पर लाखों रुपये बकाया होने की बात भी कही थी। बताया जाता है राजपाल यादव रेडीमेड की दुकान किए हुए हैं।
साथ ही कस्बे के लगभग एक सैकड़ा व्यापारियों के साथ बीसी चलाने का कार्य भी करता है। उस पर व्यापारियों का लाखों रुपया बकाया है । शुक्रवार को थानाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा, एसआई बृजेश यादव ने व्यापारी को किशनी-बिधूना मार्ग के उदयपुर कला से खोज निकाला।
व्यापारी यहां से वह दूसरी जगह जाने के लिए बस के इंतजार में खड़ा था। राजपाल यादव ने पुलिस को बताया उसका किसी ने अपहरण नहीं किया था। वह घर की पारिवारिक कलह से परेशान था।
इसलिए गायब हो गया था। थानाध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने बताया राजपाल को खोज लिया गया है। अपहरण की घटना झूठी है। इस मामले में कार्रवाई की जा रही है।
व्यापारी ने देनदारी से बचने के लिए रचा था अपहरण का नाटक
50 दिन पुराने मामले का पुलिस ने किया खुलासा