इटावा/ताखा। किसानों के लिए आलू की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में शीत गृह संचालकों की ओर से भाड़ा बढ़ाने के कारण उनकी मुसीबत और बढ़ गई है। अब एक पैकेट आलू के लिए किसानों को 10 से 20 रुपये तक ज्यादा चुकाने होंगे।
इस बार आलू की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। कुछ किसानों ने लागत निकलती न देख खेत में फसल को जुतवा दिया। इस मामले ने जोर पकड़ा तो सरकार ने आलू की सरकारी खरीद शुरू कराने की घोषणा कर दी। 650 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तय किया गया। लेकिन किसान इस भाव से भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं। अब शीत गृह संचालकों ने सामान्य आलू के लिए प्रति पैकेट भाड़ा 115 रुपये से 125 रुपये कर दिया है। सुगर फ्री आलू के प्रति पैकेट का भाड़ा 140 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये किया गया है। जिले में इस बार 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में आलू किया गया है।
किसानों का कहना है कि आलू की बुआई से लेकर उपज को मंडी तक पहुंचने में करीब 16300 रुपये का खर्च आ रहा है। एक बीघा में औसतन 25 क्विंटल आलू ही निकल रहा है। 650 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से अगर इसे बेचें तो 16250 रुपये ही मिल रहे हैं। यानि 50 रुपये का घाटा है। अब कोल्ड स्टोर में 50 पैकेट आलू रखवाते हैं तो 125 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से 6250 रुपये और देने होंगे। यानि एक बीघा में हुए 50 पैकेट (25 क्विंटल) आलू पर लागत ही 22550 रुपये हो जाती है। ऐसे में आलू 12 से 15 रुपये किलो पहुंचेगा तभी बेचना फायदेमंद रहेगा।
इस बार 15 फीसदी कम है पैदावार
इस वर्ष आलू की पैदावार पर भी असर पड़ा है। बीते साल की अपेक्षा करीब 15 फीसदी तक कम आलू निकल रहा है। किसानों के अनुसार प्रति बीघा सात बोरी आलू बीज, एक बोरी डीएपी, एक बोरी यूरिया, 10 किलोग्राम पोटाश, दो किलोग्राम सल्फर डाली जाती है। वहीं चार बार सिंचाई होती है। खेत तैयार करने के लिए चार बार अलग-अलग यंत्रों से जुताई की जाती है। इसके बाद आलू की मशीन से बुआई होती है। करीब चार माह में फसल तैयार होती है। पाले से बचाने के लिए तीन बार कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। खोदाई के समय छह श्रमिक आलू को खेत से उठाने में लगते हैं। बारदाना, पल्लेदारी, वाहन भाड़ा, कोल्ड स्टोरेज भाड़ा लगने के बाद आलू मंडी तक पहुंचता है।
एक बीघा में अनुमानित लागत
बीज- 6000
खाद- 2300
पानी- 300
दवा- 600
जुताई- 1500
श्रमिक- 3000
बारदाना- 1600
वाहन भाड़ा- 1000
शीत गृह भाड़ा- 6250
कुल लागत - 22550 रुपये
किसानाें ने बताई समस्या
फोटो-38- अमित कुमार।
चित्तरपुरा निवासी आलू किसान अमित कुमार ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में पहुंचने के बाद आलू की लागत करीब 900 रुपये क्विंटल है। किसान का आलू 15 रुपये किलो बिके तब कहीं जाकर कुछ फायदा होगा।
फोटो-39- राजेश दुबे।
नगला लछी निवासी राजेश दुबे ने बताया कि इस साल कोल्ड स्टोरेज वालों ने सामान्य आलू पर 10 और सुगर फ्री आलू पर 20 रुपये प्रति क्विंटल भाड़ा बढ़ाया है। इससे किसानों की हालत और पतली हो गई है।
बछरोई निवासी किसान पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि कई किसानों ने उधार लेकर फसल की थी। फसल होते ही उधारी चुकानी थी। लेकिन बाजार में जो भाव है उससे तो लागत निकलनी मुश्किल है। ऐसे में किसान पर कर्ज का बोझ और बढ़ेगा।
कुदरैल निवासी किसान संजू तिवारी ने बताया कि जिन किसानों के खेत में पैदावार कम निकल रही है, उनकी लागत ज्यादा आ रही है, ऐसे किसानों को ज्यादा नुकसान हो रहा है। सरकार को कायदे से समर्थन मूल्य और बढ़ाना चाहिए।
शीत गृह संचालक बोले
शीतगृह संघ इटावा के अध्यक्ष राजेश अरोड़ा ने बताया कि हर साल अमोनिया गैस की कीमत में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा टूट-फूट की मरम्मत भी करानी होती है। कर्मचारियों का भुगतान भी बढ़ता है। हर चीज पर नजर डालें तो सबकी कीमतें चढ़ी हैं। यही कारण है कि बैठक के बाद किराये में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। डीएम के साथ होने वाली बैठक में भी इस पर चर्चा होगी।
कचौरा रोड स्थित सांई कोल्ड स्टोर के मालिक श्रीनिवास ने बताया कि शीतगृह में काम करने वाले कर्मचारियों का मानदेय भी इस बार बढ़ाया गया है। इसके अलावा और भी चीजें है जिनकी कीमतों में वृद्धि हुई है। यही कारण है कि लखनऊ में हुई बैठक में प्रति पैकेट का भाड़ा 135 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन जिले के कोल्ड स्टोर संचालकों ने इसे 125 रुपये ही किया है।
शीत गृह के लिए जरूरी अमोनिया गैस से लेकर इनके रखरखाव का खर्च भी ज्यादा हुआ है। यही कारण है कि किराये में कुछ बढ़ोतरी की गई है। जल्द ही जिलाधिकारी के साथ कोल्ड स्टोर संचालकों की बैठक होनी है। इसमें भाड़ा कम करने को लेकर बात की जाएगी। जिले में 53 कोल्ड स्टोर हैं और इनकी क्षमता करीब छह लाख मिट्रिक टन है। अभी तक 48 फीसदी भर चुके हैं। - सुनील कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।