इटावा। करीब 10 दिन पहले हुई ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की फसलों के साथ ही उनके सपने भी बहा दिए। लखना, जसवंतनगर और चकरनगर क्षेत्र के कई किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। सर्वे का काम धीमा होने की वजह से अभी तक बड़ी संख्या में किसानों तक बीमा कंपनी के कर्मी नहीं पहुंच पाए हैं। हालांकि कृषि विभाग की ओर से किसानों को मदद के रूप में मोदा अनाज के बीज बांटने की तैयारी कर ली गई है।
गेहूं की फसल को बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने बर्बाद कर दिया। छह तहसीलों में राजस्व सर्वे ने अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ी है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों तक अभी टीम पहुंची भी नहीं है। प्रभारी एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गोंड ने बताया कि सभी तहसीलदारों को तेजी से सर्वे कराने के निर्देश हैं। सर्वे रिपोर्ट का काम पूरा होने के बाद मुआवजा दिलाया जाएगा। मानपुरा और चांदई गांव के किसान परेशान हैं।
सवा बीघा में किया था गेहूं, पूरा हो गया बर्बाद
मानपुरा गांव की विधवा मीरा देवी ने बताया कि उन्होंने सवा बीघा खेत में जुड़ी पूंजी लगाकर गेहूं की फसल ही थी। फसल में दाने आने लगे थे। लहलहाती फसल देखकर बहुत खुश थीं। एक बेटा है। वह दिव्यांग है। दोनों किसी तरह खेती करके जीवनयापन कर लेते हैं। पिछले सप्ताह हुई बेमौसम बारिश ने चौपट कर दिया। फसल गिर गई है। अब घर कैसे चलेगा, इसकी चिंता खाए जा रही है। अभी तक सर्वे करने कोई नहीं आया।
तीस बीघा में आधी फसल चौपट
मानपुरा के अर्जुन सिंह ने साढ़े सात बीघा खेत लेकर गेहूं की फसल की थी। बताया कि बेमौसम बारिश और हवाओं में आधी से ज्यादा फसल बिछ गई है। अभी तक कोई भी सर्वे टीम नहीं आई है। अब मुआवजे के आसरे हैं, पर कब तक मिलेगा इसकी कोई जानकारी नहीं दे रहा है। अब घर चलाना भी मुश्किल है। खेती कम होने की वजह से मजदूरी करके घर चला रहे हैं।
खेत में कटी पड़ी सरसों की फसल भीगी
चांदई गांव के सुरेश दिवाकर ने बताया कि करीब 10 दिन पहले हुई बारिश ने तबाह कर दिया। छोटा किसान होने की वजह से बंटाई पर लेकर सरसों की थी। फसल तैयार होने के बाद काटने का काम चल रहा था। कुछ बड़ी संख्या में गट्ठर काटकर खेत में ही डाल दिए थे। बारिश ने कटी पड़ी फसल को भिगो दिया। इससे अब रोटी खाने के भी लाले पड़ गए हैं। अभी तक कोई सर्वे करने नहीं आया है।
पूरी फसल खराब, भुखमरी का आलम
चांदई मौजा के उदयवीर ने दुखी होते हुए बताया कि पिछले वर्ष भी उनकी फसल मौसम की भेंट चढ़ गई थी। इस बार घर की पूंजी लगाकर गेहूं की फसल दो बीघे में की थी। फसल में दाने आने लगे थे, लग रहा था कि इस बार अच्छा उत्पादन होगा तो जिंदगी ट्रैक पर आ जाएगी। पर 10 दिन पहले हुई बारिश और उसके बाद चली बारिश ने सब तबाह कर दिया। अब भुखमरी की कगार पर हैं। अभी तक कोई सर्वे के लिए नहीं आया है।