आशा कार्यकत्री के पास दवा लेने आए ग्रामीण। संवाद
- फोटो : ETAWAH
इटावा। यमुना एवं चंबल का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ प्रभावित लोग घरों में लौटने लगे हैं। अब बीमारियों ने ग्रामीणों पर हमला बोल दिया है। ग्रामीणों को बुखार, खांसी, जुकाम की समस्या हो रही है। सबसे ज्यादा ग्रामीण खाज-खुजली से प्रभावित हैं। कच्चे घरों में नमी की समस्या है।
जिला अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति गुप्ता ने बताया बाढ़ ग्रस्त स्थानों पर पानी कम हो रहा है। ऐसी स्थिति में वहां के लोग साफ-सफाई का बहुत ध्यान दें। संभव हो तो एक सप्ताह तक नमी युक्त स्थानों से दूर रहें। त्वचा में फंगस व वैक्टीरियल इंफेक्शन नमी की वजह से हो रहा है। ग्रामीणों को खाज-खुजली की समस्या हो रही हैं। ऐसे में लापरवाही न बरतें। त्वचा संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर से संपर्क कर उचित इलाज लें। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बीएल संजय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हालात से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने छह मोबाइल टीमों समेत कुल 42 टीमें लगाई हैं। इन टीमों की सहायता से गांव-गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं।
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के नोडल अफसर डॉ. यतेंद्र राजपूत ने बताया कि आशा कार्यकर्ता भी प्रधानों के साथ समन्वय स्थापित कर गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगा रहीं हैं। बुखार, खांसी, जुकाम व त्वचा संबंधी समस्याएं ज्यादा देखी जा रही हैं। गांवों में ब्लीचिंग पॉउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। चकरनगर क्षेत्र में भरेह, हरौली बहादुरपुर, गढ़ा कासदा, गोहानी, रनिया, महेवा ब्लॉक में नंदगांवा, भदैया, दालिद नगर, अंधावा, बढ़पुरा ब्लॉक में पछायगांव, बसरावा, मढ़ैया बढ़पुरा गांव में बाढ़ का असर ज्यादा देखा गया है।
डॉ. प्रीति गुप्ता ने बताया कि घर के आसपास साफ-सफाई रखें। समय-समय पर हाथ धोते रहें। ताजा भोजन करें। पानी उबालकर पिएं। नमी युक्त कपड़े न पहनें। हल्के व फुल कपड़े पहनें। सफेद सिरके की कुछ बूंदे पानी में डालकर नहाएं व नारियल तेल शरीर पर लगाएं। बक्से में या नमी युक्त काफी दिन के रखे हुए कपड़े धोने के बाद पहनें। गीले जूते व चप्पल का प्रयोग न करें।