इटावा। नहाय खाय के साथ शुक्रवार से छठ पर्व शुरू हो गया। महिलाओं ने मिट्टी का चूल्हा बनाकर चावल, चने की दाल और लौकी बनाकर परिवार सहित प्रसाद ग्रहण किया। ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं धुलकर सुखाया गया।
शनिवार से महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। रात में पूजा करने बाद हवन किया जाएगा। इसके बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगी। रविवार को ठेकुआ बनाएंगी। अर्घ्य देने के लिए आसपास के तालाब और सरोवरों पर सज्जा की गई है।
छठ पूजन के दौरान कोसी भरने की परंपरा निभाई जाती है। जोड़े में कोसी भरने को बेहद शुभ माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के आंगन में या छत पर कोसी पूजन किया जाता है।
गन्ने से बनाया जाता है छत्र
कोसी भरने से पहले पांच गन्नों की मदद से छत्र मनाया जाता है। एक लाल कपड़े में ठेकुआ, फलों का अर्क, केला सहित अन्य फल रखकर गन्ने की छत्र से बांधा जाता है। छत्र पर मिट्टी से बना हाथी रखा जाता है। इस पर घड़ा रखकर हाथी को सिंदूर लगाया जाता है और घड़े में मौसमी फल, ठेकुआ, अदरक, सुथनी सहित अन्य पूजा की सामग्री डाली जाती है। इसके ऊपर दीया जलाया जाता है। महिलाएं मन्नत पूरी होने की खुशी में गीत गाती हैं।