सैफई। ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी में तीमारदारों के साथ हुई मारपीट के मामले में शुक्रवार रात दो डॉक्टर, तीन स्टॉफ के साथ ही 15 अज्ञात के खिलाफ विभिन्न धाराओं में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है।
मैनपुरी जिले के थाना दन्नाहार ग्राम घिटोली निवासी राजन सिंह ने थाने में तहरीर दी। इसमें डॉ. हर्ष, डॉ. विवेक चौधरी, स्टाफ नर्स वैकट, चंद्रजीत यादव, रमेश यादव व 10-15 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप है कि 12 फरवरी की शाम साढ़े सात बजे गांव के अशोक सिंह को सड़क हादसे में गंभीर घायल होने पर ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे थे। यहां पर्चा बनवाकर फाइल बनवाने के लिए 17 नंबर कमरे में डॉक्टर रुद्र के पास अपने साथी हरेंद्र प्रताप के साथ पहुंचे। तो डॉक्टर ने उनके मरीज का इलाज न करते हुए पर्चा फेंक दिया था।
आरोप है कि डॉक्टर ने फाइल बनाने से मना कर दिया और गाली-गलौज की। डॉक्टरों की अभद्रता का वीडियो साथी ने अपने मोबाइल में बना लिया तो यह देखकर डॉक्टर ने एक अन्य साथी और स्टॉफ के साथ दोनों को कमरे में बंद करके लाठी-डंडे व लात-घूसों से बुरी तरह पीटा। आरोप है कि जान से मारने की नीयत से कैंची से प्रहार भी किया। साथी हरेंद्र की जेब में रखा मोबाइल व 40 हजार रुपये छीन लिए।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि उक्त घटना के बाद पुलिस के दबाव में उनसे यह भी लिखवाया गया कि वह अपने मरीज को इलाज बाहर करवाने के लिए जा रहे हैं। इसके बाद वह लोग अपने मरीज को पुष्पांजलि अस्पताल आगरा ले गए।। पीड़ित राजन सिंह ने 14 फरवरी को एसएसपी कार्यालय में पहुंचकर प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने सैफई थाना प्रभारी बलराम मिश्रा को जांच के निर्देश दिए थे।
शुक्रवार शाम थाना पुलिस ने घायल तीमारदारों का मेडिकल परीक्षण कराया और तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। थाना प्रभारी बलराम मिश्रा ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन से लिखित में घटना वाले दिन के सीसी फुटेज के साथ ड्यूटी पर मौजूद डाॅक्टर की रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस जांच में कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं किया जा रहा है।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो करेंगे कार्य बहिष्कार
डॉ. हर्ष, डॉ. विवेक चौधरी का कहना है कि तीमारदार ने महिला डॉक्टर कीर्ति से अभद्रता की थी और अपने आप को एक पार्टी का नेता बताकर धमकी दी थी। इस संबंध में घटना वाले दिन ही पीजीआई पुलिस चौकी पर आरोपी तीमारदारों के खिलाफ लिखित में प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन पुलिस ने एक तकतरफा कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी कहा अगर पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की तो हम लोग कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठ जाएंगे। हमारा प्रार्थना पत्र सबसे पहले दिया गया था, रिपोर्ट अभी तक क्यों दर्ज नहीं की है।