इटावा। हमें गौरैया को बचाने का प्रयास करना चाहिए। रोजाना थोड़ा अनाज और पानी चिड़ियों के लिए रखना चाहिए। इससे हो सकता है कि रूठा मेहमान घर के आंगन में फिर फुदकने लगे।
यह बात पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजा का बाग की प्रधानाचार्या वासिफा तबस्सुम ने विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (स्कॉन) और वन विभाग की गोष्ठी में कही। गौरैया चिड़िया लुप्त होती जा रही है, गांव में भी इनके घरौंदे कम हैं। स्कॉन सचिव वन्यजीव विशेषज्ञ संजीव चौहान ने कहा जब हम छतों पर अनाज सुखाते थे तो गौरैया को भोजन प्राप्त हो जाता था। फसलों में पाए जाने वाले कीड़े मकोड़ों को गौरैया खाकर अनाज को नुकसान से बचाती थीं। पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प लेकर घरों में घोंसला लगाकर गौरैया का संरक्षण करना चाहिए।
अरुण गुप्ता ने कहा कि अपने आसपास पाए जाने वाले सभी जीव जंतुओं के प्रति संवेदनशील रहें। कार्यक्रम में विद्यालय, स्कॉन व वन विभाग के पदाधिकारी शरद दीक्षित, नीतू यादव, आवेश कुमार अनुज तिवारी, अजय मिश्रा व जयशंकर शामिल रहे।